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न टेंडर, न डीपीआर, विभाग ने शिलान्यास का प्रस्ताव सरकार को भेजा

3 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के रिश्तों की जमीन को सालों बाद फिर हरा-भरा बनाने के लिए माही नदी पर हाईलेवल ब्रिज हो या स्टेट हाईवे का निर्माण, इन पौने दो सौ करोड़ रुपए के कामों की तकनीकी रूप से जमीन अब तक तैयार नहीं हुई।

विभाग ने इन कार्यों के शिलान्यास के प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिए हैं। अब तक डीपीआर ही नहीं बनने से समय पर इनका निर्माण नहीं हो सकेगा और चुनाव में वोट लेने में इसकी बड़ी भूमिका साबित होगी।

कुछ बड़े काम का सपना दिखाकर सत्ता हासिल करने के बाद हालिया सरकार ने चार साल तक उन पर गंभीरता से अमल नहीं किया।

ये चार साल जिले के कुछ बड़े प्रोजेक्ट को बार-बार पूरा करने के आश्वासनों में गुजरे। इनमें प्रमुख है माही नदी पर बांसवाड़ा जिले को जोड़ने के लिए प्रस्तावित संगमेश्वर आनंदपुरी तक हाईलेवल ब्रिज। यह ब्रिज डूंगरपुर जिले में चीखली गांव में प्रस्तावित है। एक अन्य बड़ा काम है, धरियावद से पीठ तक घोषित किए गए स्टेट हाईवे नं. 91 का है। आज भी सड़क की भौतिक स्थिति तीन साल पहले स्टेट हाईवे घोषणा के समय जैसी ही है। सड़क को स्टेट हाईवे के मापदंडों के अनुसार चौड़ा और मजबूत बनाने का कार्य अब तक नहीं किया गया। इसी तरह जिले की 314 किलोमीटर सड़कों को नए सिरे से बनाए जाने का काम भी लंबित है। जून के बाद कभी भी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है, उसके बाद कोई शिलान्यास या घोषणा नहीं हो सकेगी। साथ ही विपक्षियों के पास इन कार्यों को नहीं कराने के आरोप लगाने का मौका तैयार हो जाएगा। इस कारण इन तीनों बड़े प्रोजेक्ट के शिलान्यास बिना किसी तकनीकी तैयारियों के कराए जाने की योजना है।

अधिकारियों ने ऐसे किस तरह प्रस्ताव तैयार किए हैं। टेंडर डीपीआर तैयार नहीं है, इससे जनता को धोखा होगा। उनको बुलवाकर पता करते हैं। माधवलाल वरहात, जिला प्रमुख

चीखली. माही नदी में कडाणा बेकवाटर में प्रस्तावित हाईलेवल ब्रिज का स्थान।

भास्कर संवाददाता| डूंगरपुर

बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के रिश्तों की जमीन को सालों बाद फिर हरा-भरा बनाने के लिए माही नदी पर हाईलेवल ब्रिज हो या स्टेट हाईवे का निर्माण, इन पौने दो सौ करोड़ रुपए के कामों की तकनीकी रूप से जमीन अब तक तैयार नहीं हुई।

विभाग ने इन कार्यों के शिलान्यास के प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिए हैं। अब तक डीपीआर ही नहीं बनने से समय पर इनका निर्माण नहीं हो सकेगा और चुनाव में वोट लेने में इसकी बड़ी भूमिका साबित होगी।

कुछ बड़े काम का सपना दिखाकर सत्ता हासिल करने के बाद हालिया सरकार ने चार साल तक उन पर गंभीरता से अमल नहीं किया।

ये चार साल जिले के कुछ बड़े प्रोजेक्ट को बार-बार पूरा करने के आश्वासनों में गुजरे। इनमें प्रमुख है माही नदी पर बांसवाड़ा जिले को जोड़ने के लिए प्रस्तावित संगमेश्वर आनंदपुरी तक हाईलेवल ब्रिज। यह ब्रिज डूंगरपुर जिले में चीखली गांव में प्रस्तावित है। एक अन्य बड़ा काम है, धरियावद से पीठ तक घोषित किए गए स्टेट हाईवे नं. 91 का है। आज भी सड़क की भौतिक स्थिति तीन साल पहले स्टेट हाईवे घोषणा के समय जैसी ही है। सड़क को स्टेट हाईवे के मापदंडों के अनुसार चौड़ा और मजबूत बनाने का कार्य अब तक नहीं किया गया। इसी तरह जिले की 314 किलोमीटर सड़कों को नए सिरे से बनाए जाने का काम भी लंबित है। जून के बाद कभी भी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है, उसके बाद कोई शिलान्यास या घोषणा नहीं हो सकेगी। साथ ही विपक्षियों के पास इन कार्यों को नहीं कराने के आरोप लगाने का मौका तैयार हो जाएगा। इस कारण इन तीनों बड़े प्रोजेक्ट के शिलान्यास बिना किसी तकनीकी तैयारियों के कराए जाने की योजना है।

अधिकारियों ने ऐसे किस तरह प्रस्ताव तैयार किए हैं। टेंडर डीपीआर तैयार नहीं है, इससे जनता को धोखा होगा। उनको बुलवाकर पता करते हैं। माधवलाल वरहात, जिला प्रमुख

विभाग की नजर में प्रक्रिया में है अब तक सब कुछ

1. चीखली आनंदपुरी सड़क बनाते हुए संगमेश्वर में माही नदी पर हाईलेवल ब्रिज के निर्माण पर 99 करोड़ 16 लाख 74 हजार के करीब अनुमानित खर्च माना गया है। इस ब्रिज के निर्माण से डूंगरपुर, बांसवाड़ा जिलों सहित गुजरात राज्य की कुल 5 लाख की आबादी को फायदा होगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जब कडाणा बांध नहीं बना था तो लोग सहज नदी के दोनों तरफ आना-जाना करते थे। संगमेश्वर से नदी के रास्ते कुछ ही दूरी कडाणा बांध है, ऐसे में सालभर बड़ी मात्रा में पानी यहां भरा रहता है। ऐसे में लोगों को बांसवाड़ा जिले और गुजरात आने जाने के लिए 70 से 100 किलोमीटर की दूरी इस क्षेत्र के वाशिंदों को तय करनी पड़ती है। साथ ही गुजरात जाने के लिए भी इतनी ही दूरी और 4 घंटे तक का समय फिजूल खर्च होता है। यहां ब्रिज बनाए जाने की दो दशक पुरानी है और यदि यह बन जाता है तो एक बड़ा मतदाता वर्ग सत्ताधारी दल की झोली में आ जाएगा। सूत्रों के अनुसार सरकार ने कंसल्टेंट कंपनी से इसकी डीपीआर बनवाई है। इसे अब तक चीफ इंजीनियर के सामने पेश किया गया है। टेंडर की प्रक्रिया एडिशनल चीफ इंजीनियर उदयपुर स्तर पर अब तक नहीं की है। फिर भी शिलान्यास कराया जाना सवाल खड़े करता है।

2. तीन साल पहले मुख्यमंत्री बजट घोषणा में प्रतापगढ़ जिले के धरियावद कस्बे से डूंगरपुर जिले में वरसिंगपुर, सामलिया, सरोदा, पादरड़ी बड़ी होते हुए पीठ तक स्टेट हाईवे घोषित किया गया। इसके लिए डीपीआर नहीं बनी है। इसे तैयार कराया जा रहा है। इसके बाद टेंडर के बारे में सोचा जा सकता है। हालांकि इसमें वित्तीय स्वीकृति 31 करोड़ 81 लाख रुपए की जारी कराई जा चुकी है, लेकिन डीपीआर नहीं बनने से यह स्वीकृतियां जमीन पर कारगर इसलिए नहीं है, क्योंकि सड़क की भौतिक स्थितियों को लेकर तकमीना ही तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि इस सड़क के बनने से 40 हजार की आबादी को फायदा होगा।

3. कुल 314 किलोमीटर लंबाई में सड़कें टूट चुकी हैं। स्टेट रोड फंड के जरिए इसके लिए 49 करोड़ 12 लाख 81 हजार रुपए के खर्च करना प्रस्तावित है। इसमें चारों विधानसभाओं की 2 लाख आबादी को फायदा होना बताया गया है। सूत्रों की मानें तो अब तक उदयपुर में एडिशनल चीफ इंजीनियर स्तर पर इसके टेंडर ही नहीं हुए है।

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