डूंगरपुर। अधिकमास को लेकर श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को पांडवों के स्वर्गारोहण के साथ ही भीष्म पितामह का अंतिम कृष्ण दर्शन, प्राण प्रयाण के समय ईश्वर की प्रीति के दर्शन का वर्णन किया गया।
पंडित संजय पंड्या शास्त्री ने प्रवचन में बताया कि भक्त अपने हाथ से जो भी पूर्ण कार्य किया है उसे भूल जाओ और जो पाप है उसे याद रखकर जीवन में पुण्य कर्म के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज तक मौज शौक, भोग और पाप में कितना ही खर्च कर दिया, लेकिन पुण्य कर्म के लिए किया गया व्यय ही हमेशा जीवन सद्मार्ग की ओर ले जाता है। भगवान के स्वधामगमन और यदुवंश के विनाश के बारे में बताते हुए कहा कि युधिष्ठिर ने स्वर्गारोहण का निश्चय किया। राजा परीक्षित को सिंहादन दे दिया। केदारनाथ में भगवान की पूजा की। जीवन और शिव का मिलन हुआ। पूजा के यजमान भूपेंद्रसिंह चौहान परिवार ने यज्ञ में आहुतियां दी गई। पंडित रोशन भट्ट ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की। शाम को आरती का आयोजन किया गया। मोहन पंचाल, अशोक चौबीसा, महेश शर्मा मौजूद थे।
भगवान का विष्णु अभिषेक किया
शहर की रविंद्रनाथ टैगोर कॉलोनी में श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर पर भागवत ज्ञान महोत्सव के तहत धार्मिक आयोजन किए गए। भागवत कथाकार भूपेंद्र पंड्या पुनाली के सानिध्य में प्रभू पंड्या की ओर से भगवान विष्णु अभिषेक, भागवत पारायण की पूजा की गई। भजन-कीर्तन किए गए और जीवन को सुखी बनाने के लिए नर-नारायण और नारी के महत्व पर प्रकाश डाला। सुशीला, नयना, पद्मावती पंड्या, जगा बेन मौजूद थे।