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मनरेगा कार्यस्थल के पास आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का होगा पालन-पोषण

3 वर्ष पहले
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कलेक्टर राजेंद्र भट्ट की ओर से मनरेगा कार्यस्थल के पास स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को क्रेच के रूप में विकसित करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसमें सेव द चिल्ड्रन संस्थान की ओर से तीन महीने के लिए प्रैक्टिकल वर्क में शानदार रिजल्ट आने के बाद अब जिला प्रशासन स्वयं इस काम को करेगा।

इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और मनरेगा कार्य स्थल पर बच्चों के लालन-पोषण के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस किया जाएगा। महात्मा गांधी नरेगा कार्य स्थल पर कार्य करने वाले श्रमिक के साथ हमेशा बच्चों को संभालने की परेशानी रहती है। अधिकांश बच्चे अपने माता-पिता के साथ कार्य स्थल पर पहुंचते हैं। जहां पर बच्चे तेज धूप, सर्दी और बारिश में परेशान होते हैं। वहीं इन बच्चों के बीमार होने सहित पोषण नहीं मिलने की शिकायत अक्सर रहती है। वहीं कुछ मनरेगा श्रमिक अपने छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर आते हैं। जहां पर उनके बड़े बच्चे स्कूल छोड़कर देखभाल करते हैं। इससे उस परिवार के सभी बच्चों को शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य का नुकसान होता है। इसके लिए मनरेगा कार्य स्थल पर वृद्ध महिला मजदूर को कुछ राशि देकर बच्चों के ध्यान रखने का कार्य दिया जाता है, लेकिन अक्सर इसमें सफलता नहीं मिलती है। ऐसे में अब डूंगरपुर जिले में नवाचार के रूप में पायलट प्रोजेक्ट में मनरेगा आंगनबाड़ी क्रेच के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों और मनरेगा कार्य स्थल को जोड़ा जाएगा। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकन बढ़ने के साथ ही बच्चों का भविष्य सुधरेगा।

झौंथरी पंचायत समिति का एक आंगनबाड़ी केंद्र जिसे मनरेगा क्रेच के रूप में विकसित किया।

500 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को जोड़ा जाएगा

संस्थान की ओर से सिर्फ 17 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को भेजकर नामांकन बढ़ाया गया था। ऐसे में मनरेगा कार्य स्थल के आसपास के करीब 500 आंगनबाड़ी केंद्र को क्रेच के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे यहां पर करीब हजारों बच्चों को लाभ मिलेगा। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी मनरेगा के तहत मिलने वाली केयर टेकर राशि का भुगतान होगा। इससे उन्हें आर्थिक संबल मिलेगा।

सेव द चिल्ड्रन के प्रोजेक्ट पर जताई सहमति

सेव द चिल्ड्रन संस्थान की ओर से कुछ माह पूर्व तीन महीने के लिए 17 आंगनबाड़ी केंद्रों पर क्रेच के रूप में कार्य किया गया था। संस्थान ने झौंथरी और डूंगरपुर पंचायत समिति के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन किया। इसमें मनरेगा कार्य स्थल के पास के आंगनबाड़ी केंद्रों को क्रेच के रूप में विकसित किया। इसमें मनरेगा श्रमिक के बच्चों को समझाइश कर आंगनबाड़ी केंद्रों पर रखा गया। जहां पर 3 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में रखे गए। वहीं बड़े बच्चे जिन्हें घर पर देखभाल के लिए रखा गया था, उन्हें स्कूल से जोड़ा गया। इससे करीब आंगनबाड़ी केंद्र में 30 प्रतिशत नामांकन बढ़ गया। वहीं स्कूलों में 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ा। ड्रॉपआउट का आंकड़ा भी आधा हो गया। इसी प्रोजेक्ट को कलेक्टर के समक्ष रखा गया।

चार विभाग मिलकर करेंगे कार्य

जिला परिषद के पंचायतराज विभाग, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य करेंगे। इसके लिए मनरेगा चयनित कार्य स्थल के पास आंगनबाड़ी केंद्रों की लिस्टिंग तैयार होगी। पंजीयन श्रमिक के बच्चों की लिस्ट तैयार कर स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में रखा जाएगा। इससे माता-पिता को बच्चों की किसी भी प्रकार की चिंता नहीं रहेगी। आंगनबाड़ी केंद्रों पर एनटीटी शिक्षक बच्चों को प्ले स्कूल का अध्ययन कराएगा। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के खान-पान और पोषण का ध्यान रखेंगी। आशा सहयोगिनी और एएनएम टीकाकरण, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच कर मॉनिटरिंग करने का कार्य करेंगी। वहीं स्कूल से ड्रॉपआउट होने वाले बच्चों पर मॉनिटरिंग शिक्षा विभाग करेगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों को मनरेगा क्रेच के रूप में विकसित करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसमें सभी विभाग को सम्मिलित कर बच्चों के देखभाल, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर फोकस किया जाएगा। -राजेंद्र भट्ट, कलेक्टर, डूंगरपुर

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