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56 जीएसएस और शहर बिजली व्यवस्था का ठेका संभालने वाली कंपनी का जिले में ऑफिस ही नहीं

3 वर्ष पहले
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जिले के 56 जीएसएस और शहर की बिजली व्यवस्था संभालने वाली संध्या एंड कंपनी का जिला मुख्यालय पर कोई ऑफिस और कोऑर्डिनेटर नहीं है। इस कारण डिस्कॉम के अधिकारियों से लेकर उसके तहत कार्य कर रहे तकनीकी कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। ठेका राज्य विद्युत विनामक कमेटी की ओर से पूरे राजस्थान में दिया था। इसके तहत प्रत्येक जिले में एक कोऑर्डिनेटर लगाने की व्यवस्था करनी थी। इससे स्थानीय समस्याओं और परेशानी का समाधान कर सामंजस्य बैठा सके, लेकिन कंपनी की ओर से अभी तक कोई ऑफिस और कॉडिनेटर उपलब्ध नहीं है। हर माह बिल बनाते समय एक कार्मिक आकर कंप्यूटराइज्ड बिल लेकर पहुंच जाता है। जिसे जमा कराने के बाद कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में जिला स्तर के अधिकारी हर समस्या के लिए कंपनी के अधिकारी और प्रत्येक कोऑर्डिनेटर को फोन लगाते रहते हैं। इसके बाद वहां से हर बार नया मोबाइल नंबर देकर परेशानी बढ़ा देते हैं। कंपनी की ओर से ठेका लिए एक साल पूरा होने आया है, अभी तक उन्होंने संबंधित तकनीकी कार्मिकों को वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है। जिसके कारण सभी तकनीकी कर्मचारी और अधिकारियों के पास आकर रोना रोते हैं। वहीं फील्ड में आ रही परेशानी को लेकर एईएन और जेईएन से उलझते रहते हैं।

18 लाख का प्रति माह कंपनी का बनता है बिल : संध्या एंड कंपनी के पास जिले में 56 जीएसएस 33 केवी वाले हैं। इसमें एक जीएसएस का ठेका 26 हजार मासिक है। वहीं शहर वितरण व्यवस्था एफआरटी का 3 लाख रुपए प्रति माह दिया जाता है। इस हिसाब से डिस्कॉम में प्रति माह करीब 18 लाख का भुगतान संध्या एंड कपंनी का बनता है। नियम के अनुसार जिला स्तर पर एक ऑफिस और स्थाई कोऑर्डिनेटर उपलब्ध करना है। वहीं प्रत्येक जीएसएस पर आईटीआई दक्ष तकनीकी कर्मचारी लगाने हैं। ऐसे में कई जीएसएस पर कागजों में दर्ज तकनीकी कर्मचारी की जगह अप्रशिक्षित कर्मचारी लगा रखे हैं, जिसके कारण जेईएन और ठेकेदार कोऑर्डिनेटर के मध्य विवाद होता है।

डिस्कॉम को 33 केवी जीएसएस पर लगे कार्मिकों से प्रतिदिन काम निकालना है। ऐसे में इन तकनीकी कर्मचारियों को पिछले 11 माह से भुगतान की व्यवस्था नहीं हुई है, जिसके कारण तकनीकी कर्मचारी हमेशा एईएन से उलझते रहते हैं। डिस्कॉम के उच्चाधिकारी ठेका पद्वति होने के कारण तकनीकी कर्मचारियों के भुगतान की व्यवस्था कंपनी पर डालते हैं। वहीं फील्ड में काम इन तकनीकी कर्मचारियों से लेना है। जिसका खामियाजा सीधे उपभोक्ता को उठाना पड़ता है।

एमओयू में कोऑर्डिनेटर की करनी है व्यवस्था

राजस्थान विद्युत विनामक कमेटी और संध्या एंड कंपनी हरियाणा के अनुबंध के अनुसार जिला स्तरीय कोऑर्डिनेटर की जानकारी जिला मुख्यालय पर देनी है। इसमें उसके संबंधित दस्तावेज, डिग्री, डिप्लोमा, ऑफिस पता, निवास पता और कंपनी से दिया अनुबंधन पत्र भी देना होता है, जिससे जिला स्तर पर कोई भी समस्या होने पर उसे सूचित किया जा सके। ऐसे में एमओयू के नियमों का पालन कंपनी की ओर से नहीं किया जाता है।

फील्ड से शिकायतें आ रही हैं। इसमें कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। इससे काम प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही कोऑर्डिनेटर माह में एक बार आता है। इसके बाद कोई संपर्क नहीं करता है। सीएल रोत, एक्सईएन डिस्कॉम डूंगरपुर

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