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चिकित्सा विभाग और जांच सेंटर मिलीभगत

3 वर्ष पहले
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शहर में इन दिनों 42 पैथोलॉजी सेंटर हैं, जहां हररोज 1 हजार से ज्यादा मरीजों की जांच की जाती है। इन जांच रिपोर्ट को देखकर ही डाक्टर भी इलाज की दवाइयां लिखते हैं। लेकिन एक भी पैथोलॉजी सेंटर के पास पैथोलॉजिस्ट डाक्टर नहीं है। बिना डाक्टर के ही जांच रिपोर्ट बन जाती है और बिना पैथोलॉजिस्ट डाक्टर के हस्ताक्षर के ही रिपोर्ट भी जारी हो जाती है। खास बात तो यह है कि चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के पास भी ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने सेंटर हैं और इन सेंटरों में काम - काज कैसे होता है। कारण कि इन तमाम लेबोरेट्री का पंजीयन न तो सीएमएचओ कार्यालय में होता है और न ही जिला प्रशासन के पास, इनका किसी तरह का रिकॉर्ड भी नहीं है। इनका रजिस्ट्रेशन राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल से होता है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती। इसके बाद भी हमारे डॉक्टर लेब संचालकों की रिपोर्ट पर इलाज कर देते हैं। सरकार की ओर से भी इनके संचालन को लेकर कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं होने के कारण प्राइवेट लेबोरेट्री गली-गली में खुल गई हैं। गौर करने वाली बात तो यह है कि कई बीमारियों में जांच के बिना किसी मरीज के मर्ज का पता तक नहीं लग पाता है उनकी रिपोर्ट भी इन लेबों पर कितना विश्वास किया जा सकता है।

42 पैथोलॉजी लैब में किसी के पास भी नहीं है पैथोलॉजिस्ट

कलेक्शन सेंटर बताकर कर रहे हैं जांच, निरीक्षण नही ं

गुजरात में बिना पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट को नकार रहे हैं

यह मुद्दा इन दिनों इसलिए सामने आया कि कुछ दिनों पहले ही डूंगरपुर निवासी शांतिलाल अपनी मां की जांच एक निजी सेंटर पर कराई थी। जिस आधार पर डाक्टरों ने दवाई लिखी। बाद में बीमारी ठीक नहीं होने की स्थिति में मां को लेकर वह मौड़ासा गए। जहां पर यहां की रिपोर्ट दिखाई। मौड़ासा के डाक्टर ने हैरानी से पूछा कि किस पैथोलॉजिस्ट ने जांच की है। रिपोर्ट में हस्ताक्षर तक नहीं है। इसके बाद यह मामला सामने आया कि बिना पैथोलॉजिस्ट के ही जांच की जा रही है।

निजी लैब संचालन के लिए कोई लाइसेंस नहीं

इनके संचालन के लिए किसी तरह के लाइसेंस की अनिवार्यता नहीं होने के कारण गली-गली में लैब खुल रही है। इन प्राइवेट लैब में जांच को लेकर किसी तरह का रेट कार्ड नहीं है। हर लैब पर मनमर्जी से जांच शुल्क लिया जा रहा है। इधर, चिकित्सा विभाग या प्रशासन का इन पर नियंत्रण नहीं होने के कारण लैब संचालक मनमर्जी के मालिक बने हुए है। साथ ही इन लैब संचालकों की रिपोर्ट के आधार पर ही बीमारों का इलाज भी हमारे यहां के डॉक्टर कर देते हैं, जो बड़ा सवाल भी हैं। ऐसे में साफ है कि हमारे जिंदगी के साथ किस तरह खिलवाड़ हो रहा है और सरकार ने चुप्पी साध रखी है।

यह भी है हकीकत

डॉक्टरों और लैब संचालकों में कमीशन का खेल

शहर में प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों की देखरेख में इन यह लेबोरेट्री चल रही है। डॉक्टरों के पास जो भी मरीज आता है, वे उन्हें इन लेबों पर भेजकर जांच करवाने को कहा जाता है। ऐसे में मरीज को इन निजी लेबों में रहकर महंगी रेट लेकर लूटा जाता है। लैब संचालक की ओर से प्रत्येक मरीज पर तय कमीशन इन डाक्टरों के पास पहुंचाया जाता है। डॉक्टर कमीशन के चक्कर में उन्हीं लेबों पर मरीजों को भेजता हैं।

राजस्थान पैरा मेडिकल काउंसिल का आदेश, पंजीयन नहीं हो तो करें कार्रवाई : काउंसिल ने 11 मई 2016 में राज्य के सभी सीएमएचओ को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए थे कि राजस्थान पैरामेडिकल अधिनियम 2008 के विधान के अनुसार राजस्थान राज्य क्षेत्र में कोई पैरामेडिकल प्रोफेशनल तब ही पैरामेडिकल के रुप में बतौर कार्य करने में सक्षम या अधिकृत होगी, जब वह अपना पंजीयन राज्य पैरामेडिकल में करा लेता है। बिना राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीयन के कार्य करना असंवैधानिक है। उन्होंने सभी सीएमएचओ को आदेश दिए थे कि अपने क्षेत्र में संचालित सभी पैरामेडिकल क्लिनिक(लेबोरेट्री व अन्य क्लिनिक) का निरीक्षण करें कि संस्थान पैरा मेडिकल काउंसिल से पंजीकृत है या नहीं।

जांच कर सकते हैं, रिपोर्ट जारी नहीं कर सकते

एक्ट में स्पष्ट है कि किसी एमएडी पैथोलॉजी डॉक्टर के निर्देशन में ही रजिस्टर्ड पैरामेडिकल प्रोफेशनल को काम करना है। इसके बाद भी वे रिपोर्ट पर साइन नहीं कर सकते हैं। इसका रास्ता यह निकाला है कि वे कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट जारी करने लग गए हैं। इन रिपोर्ट पर साइन लैब का नाम लिखा होता है, लेकिन पैथॉलोजिस्ट के साइन कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट होने से नहीं होने का बहाना कर दिया जाता है। यह सभी कुछ स्थानीय डॉक्टर्स अच्छी तरह से जानते भी हैं, लेकिन इलाज बिना पैथॉलोजिस्ट की रिपोर्ट पर ही हो रहा है।

बचने के तरीके : ये लेब संचालक खुद के केंद्र को कलेक्शन सेंटर बताते हैं। इसका मतलब यह है कि वे केवल सैंपल लेते हैं न कि जांच करते हैं।

लेबोरेट्री के संचालन की स्पष्ट जानकारी मुझे नहीं है। इसका पंजीयन कहा से होता है, मैं पता करता हूं। हां यह सही है कि पैथोलॉजिस्ट के बिना ही ये लैब संचालक रिपोर्ट जारी कर रहे है, नियमों के खिलाफ है। - डॉ. महेंद्र परमार, सीएमएचओ

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