अवैध बजरी खनन को लेकर तहसील क्षेत्र के किनारे से गुजर रही बनास नदी में जहां पानी का संकट गहरा रहा है। वहीं पालतु व लावारिश पशु-पक्षियों के लिए गर्मी के दिनों में भीषण पेयजल संकट गहराता है। बनास नदी में 20-25 किमी तक पानी का कोई सहारा नहीं है। ऐसे में एक किसान विगत 10 सालों से सूखी बनास नदी में अपनी कुएं की मोटर व पाइपों के द्वारा पानी डालकर पशु-पक्षियों को बचाने में जुटा हुआ है। जो एक चर्चा का विषय है।
जज्बे को सलाम
बनास नदी क्षेत्र में 15 किमी क्षेत्र में पानी नहीं, किसान बना पशु-पक्षियों का सहारा व जल मित्र
टोंक. किसान देवीलाल मीणा ने अपने निजी स्तर पर पाइपलाइन बिछाकर बनास नदी में कच्चे स्थान पर पशुओं के लिए पीने का पानी भरता हुआ।
कुओं का जलस्तर गहराया : बीसलपुर बांध के बनने के बाद बांध के निचले क्षेत्र में अवैध बजरी खनन का दोहन हो रहा है, जिसके चलते बनास नदी में बजरी नहीं होने से पानी रुक नहीं पाता। साथ ही कुओं का जलस्तर भी गहरा गया है। ऐसी स्थिति में बनास नदी के किनारे बसे गांवों के चरवाहे पक्षियों व पशुपालकों के लिए पानी का संकट गहरा जाता है। बनास नदी परिधि के क्षेत्र में कई किमी तक बनास नदी वीरान व सूखी नजर आती है। पशु-पक्षी व मवेशी भटकते रहते है।
10 साल से भर रहे हैं टांका : इसी को लेकर बनास नदी के किनारे बने जलसीना गांव के किसान देवीलाल मीणा विगत 10 सालों से करीबन 5 किमी की पाइपलाइन बिछाकर बनास नदी से एक कच्चे टांके में पानी भरता है। किसान देवीलाल मीणा द्वारा बनास नदी के इस टांके को पानी भरने से पशु, पक्षियों के अलावा चरवाहों के जानवर सरोली, कवंरावास, जलसीना, जूनिया, बंथली, सरोली के किसानों को फायदा मिल रहा है। पशुपालक रामनारायण मीणा आदि किसानों का कहना है किसान की पहल से पशु, पक्षियों व जानवरों की प्यास बुझती है।