माह ए रमजान का पहला जुमा शुक्रवार को होगा। इस बार 5 जुमा पड़ रहा है। रमजान के पहले अशरे की शुरुआत गुरुवार से हो चुकी है। रमजान का चांद दिखने के बाद मस्जिदों में गुरुवार को तराबीह की नमाज पढ़ी गई। इसके साथ ही इबादत का दौर शुरू हो गया। पहला रोजा करीब 14 घंटे 32 मिनट का होगा। माहे रमजान के दौरान शुक्रवार को तड़के 4 बजे तक सेहरी का समय है। इसके बाद शाम पौने सात बजे इफ्तार किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के ज्यादातर इलाकों में शुक्रवार को पहला रोजा रखा जाएगा। चांद दिखने पर मुसलमानों ने मुबारकबाद दी। पहले रोजे की तैयारी के साथ ही रात में तराबीह की नमाज पढ़ी गई। एक माह तक मुस्लिम भाई कुरान पाक की तिलावत और नमाज के साथ अल्लाह को याद करेंगे।
ये है खास बात: इस बार रमजान में पांच शुक्रवार (जुमे) पड़ रहे
रमजान शुरू होते ही मस्जिदों के बाहर दुकानें सज गईं है। लोग रोजा खोलने खजूर व सेवइयां खरीद रहे।
तेज गर्मी से परेशानी
माहे रमजान सबसे पवित्र महीना माना गया है। इस दौरान दिन भर रोजा रखने के साथ ही इबादत की जाती है। मई में रमजान शुरू होने के कारण रोजेदारों के लिए रोजा रखना काफी कठिन हो सकता है। दिनभर भोजन या पानी के बगैररहना होगा।
चांद दिखते ही तैयारी शुरू
बुधवार को छत्तीसगढ़ में चांद न दिखने के कारण शुक्रवार को पहला रोजा तय हो गया था। देर शाम को चांद दिखते ही मुसलमानों ने तैयारी शुरू कर दी। इफ्तार और सेहरी के लिए खाद्य सामग्री की खरीदी शुरू हो गई। इफ्तार के लिए खजूर की जमकर खरीदी हुई। गर्मी का मौसम देखते हुए शरबत तैयार करने की सामग्री भी खरीदी गई। कुछ स्थानों पर सेवइयों की बिक्री भी शुरू हो गई है।
रहमतों का है ये महीना
मौलाना कलीम अशरफी ने बताया कि माहे रमजान इबादत और अल्लाह की रहमतों का महीना है। इस महीने में मुसलमान दिन भर रोजा रखकर ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करने में समय व्यतीत करते हैं। इससे मुसलमानों को सवाब (पुण्य) हासिल होता है। अल्लाह रहमतों से नवाजते हंै।