श्रमण संघ दुर्ग द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन जैन शिक्षण व संस्कार शिविर के आठवें दिन महासती डॉ. चंद्रप्रभा ने बच्चों को कई रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी दी। जिज्ञासु बच्चों ने अपने मन की शंका का समाधान भी किया।
महासती डॉ. चंद्रप्रभा ने बच्चों को रात्रि भोजन न करने के कई फायदे बताए। उन्होंने बताया कि रात के समय पेट की भोजन पचाने वाली ग्रंथियां कम सक्रिय रहती हैं और शरीर के अंदर विकार पैदा करती है। इसलिए हमें रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए। सूर्यास्त के पूर्व भोजन करते समय यह ग्रंथियां सूर्य की किरणों से सक्रिय रहती हैं, जो भोजन को जल्दी पचाती है। शिविर में बच्चों ने रात्रि भोजन न करने का संकल्प लिया। इन बच्चों को समापन अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा। जैन आर्ट ऑफ लिविंग के योग प्रशिक्षक गुलाब लोढा ने संस्कार शिविर में बच्चों को योग सिखाया और उसके फायदे बताए। शिविर में हर्षदा कर्नावट, नीलू संचेती, चंदा रुणवाल, किरण संचेती, मीना बाफना, आरती पारख आदि ने बच्चों को संस्कार व धार्मिक ज्ञान की पढ़ाई कराई।