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भिलाई से छिनी ईस्ट जोन में नंबर-1 की रैंकिंग सालभर में सफाई का टेंडर तक नहीं कर पाए

3 वर्ष पहले
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने बुधवार को स्वच्छ शहरों की सूची जारी की। केंद्र ने 52 अलग-अलग कैटेगरी में नंबर-1 बनने वाले शहरों को इसमें शामिल किया। सूची में भिलाई निगम का नाम ही नहीं है। जबकि पिछले साल ईस्ट जोन कैटेगरी में 1 से 3 लाख से अधिक और 10 लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों की सूची में भिलाई नंबर-1 था। तब ओवरऑल रैंकिंग 54 थी। हालांकि, भिलाई की रैंकिंग अभी क्या है? इसका खुलासा नहीं हुआ है। इस बार ईस्ट जोन में देश के दो शहरों में झारखंड के बूंदू और तेलंगाना के विजयवाड़ा नंबर-1 है। पहले यह तमगा भिलाई के पास था।

इस रैंकिंग से मेयर देवेंद्र यादव थोड़ा भी इत्तेफाक नहीं रखते। वे मानते हैं कि इस साल निगम प्रशासन ने सफाई के लिए जो काम किया, वो बेहतर नहीं था। मेयर यादव ने तो निगम आयुक्त से लेकर अफसरों पर निशाना सााधते हुए यह तक कह दिया कि, अधिकारी सिर्फ मंत्री आैर भाजपा को चुनाव जीताने के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए सफाई के बारे में काम करना ही भूल गए। जब दैनिक भास्कर ने रैंकिंग से पिछड़ने वाले कारणों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले एक साल से निगम ने सफाई के लिए ठेका तक नहीं किया है। विपक्ष टेंडर का विरोध कर रहा है।

भिलाई में सफाई पर होने वाले खर्च और उसके संसाधन...

वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

शहर में कचरा जलाने का विषय गंभीर है, ट्रेंचिंग ग्राउंड में रोज कचरा जल रहा है। क्योंकि,निगम ने अब तक कचरा प्रोसेसिंग करना शुरू नहीं किया। तस्वीर नेवई की।

अगर ये सालभर में ये तीन चीजें दुरूस्त कर लेते तो नहीं आती ऐसी नौबत...

सार्वजनिक शौचालय का मेंटेनेंस नहीं किया

शहर में बने शौचालयों का मेंटेेनेंस बड़ा विषय था। निगम ने सिर्फ रंग-रोगन का काम किया। ज्यादातर शौचालय में पानी तक की व्यवस्था नहीं है। खुर्सीपार और कैंप इलाके के वार्डों में बने शौचालय में यही हालात है।

19करोड़

रुपए सफाई पर सालाना खर्च है।

कचरा जलाने के बजाय प्रोसेसिंग करते तो सुधर जाती रैंकिंग

टेंपररी व्यवस्था को लागू करने में अव्वल रहा निगम

निगम ने सफाई के मामले में स्थायी समाधान कभी नहीं निकाला। हमेशा अस्थाई व्यवस्था को लागू करने में लगे रहे। सालभर से निगम ने सफाई के लिए टेंडर तक नहीं किया। कलेक्टर दर व्यवस्था लागू है। विपक्ष की आपत्ति के बाद ठेका भी नहीं हुआ है।

47

वार्डों की सफाई का जिम्मा निगम के पास

54रैंक था पिछले साल भिलाई का सर्वेक्षण में

पब्लिक प्लेस में झाड़ू तक नहीं लगा सके, सिर्फ बातें

शहर के सार्वजनिक स्थलों में निगम झाड़ू तक नहीं लगा रहा। लोग इसकी शिकायत करते रहे। स्वच्छता एप में शिकायतें भी डाली गई। मगर जिम्मेदारों ने एक्जीक्यूशन करने के बजाय विभिन्न कार्यक्रमों में भाषण देते रहे और िसर्फ बातें करते रहे।

05

जोन में निगम का स्वास्थ्य अमला है

अफसरों ने सफाई पर ध्यान ही नहीं दिया...

पिछले साल से भिलाई ईस्ट जोन-1 में नंबर था। तब सभी ने मेहनत की। इस साल निगम के अधिकारी मंत्री के पीछे घूमते रहे और बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए काम कर रहे हैं। निगम प्रशासन ने सफाई पर फोकस ही नहीं किया। इसलिए रैंकिंग गिरी। देवेंद्र यादव, मेयर, भिलाई

12करोड़ से ज्यादा राशि सिर्फ स्वच्छता पर खर्च

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