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सारे कॉलेज अपनी मेरिट से लेंगे दाखिला पिछले साल का सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बंद

3 वर्ष पहले
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राजधानी और प्रदेश के छोटे-बड़े 500 से ज्यादा कॉलेजों में एडमिशन के लिए पिछले साल लागू किया गया सेंट्रलाइज्ड एडमिशन सिस्टम इस बार खत्म कर दिया गया है। इस सिस्टम से पिछले साल छात्रों को कालेजों की सीटें बांटने में जबर्दस्त परेशानी हुई थी। यही नहीं, नंबरों से सीट आवंटन के बाद सैकड़ों छात्र कालेज बदलवाने के लिए भटके थे। सभी कालेजों को अपने यहां एडमिशन और मेरिट का कटऑफ तय करना मुश्किल हो गया था। इन परेशानियों से बचने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सेंट्रलाइज्ड सिस्टम खत्म कर दिया है और पुराना सिस्टम अपनाया है। इसके तहत, हर छात्र अपनी पसंद के कालेज में फार्म दाखिल करेंगे। जमा फार्म के आधार पर कालेज अपनी एडमिशन सूची निकालेंगे और कटऑफ भी तय कर देंगे। इस आधार पर छात्रों को सीटें मिल जाएंगी। वेटिंग लिस्ट जारी करने की वजह से कालेजों को अपनी सीटें भरने में भी दिक्कत नहीं होगी।

प्रदेश के कालेजों में दाखिले की प्रक्रिया जून के पहले हफ्ते से शुरू होगी। सिस्टम में बदलाव की सूचना उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को भेज दी है। पिछले साल राज्य के सभी सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में दाखिले के लिए एक नोडल एजेंसी तय की गई थी। इसी एजेंसी के जरिये ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए, फिर सीटें वहीं से बांटी गईं। लेकिन इस वजह से इतनी दिक्कतें आईं कि विश्वविद्यालय और कालेज, दोनों परेशान हुए। इसलिए इस बार एक एजेंसी के माध्यम दाखिले की बजाए विश्वविद्यालयों और कालेजों को जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने सभी को चिट्ठी लिखकर बता दिया है कि विश्वविद्यालय व कॉलेज खुद ही तय करें कि उन्हें कैसे प्रवेश देना है।

शहर के बड़े कॉलेजों में 70% से ऊपर वालों को ही साइंस

राज्य के प्रतिष्ठित सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में बीएससी प्रथम वर्ष में उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा जिन्हें बारहवीं में कम से कम 70 फीसदी अंक मिले हों। राजधानी समेत अन्य जगह पर स्थित कॉलेजों में साइंस के लिए कटऑफ इतना ही रहने के आसार हैं। बड़े कॉलेज जैसे साइंस कॉलेज रायपुर, डिग्री गर्ल्स कॉलेज, साइंस कॉलेज दुर्ग समेत अन्य में विज्ञान संकाय में 70 फीसदी से कम पर सीटें मिलनी मुश्किल हैं। यही नहीं, शहर के प्रमुख कॉलेजों में कामर्स में भी कटऑफ 55-60 प्रतिशत तक रहेगा। दुर्गा कॉलेज, महंत कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज में इन सीटों के लिए मेरिट ज्यादा होने की संभावना है।

प्रदेश के सभी विवि के कॉलेजों से जारी होंगे एडमिशन फॉर्म

प्रदेश में पं. रविशंकर शुक्ल विवि के अलावा बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर, दुर्ग समेत अन्य विश्वविद्यालयों से सैकड़ों कॉलेज जुड़े हैं। विश्वविद्यालय के माध्यम सभी कॉलेजों में एक साथ ऑनलाइन एडमिशन व उससे लिए आवेदन मंगाना कठिन है, क्योंकि वहां सुविधाओं का अभाव है। वहां से सीटें आवंटित करने से कालेज प्रबंधन और छात्रों के सामने भी कई तरह की परेशानियां आ गई थीं। सभी कॉलेजों के पास ऑनलाइन दाखिले का सिस्टम भी नहीं है। इसलिए दाखिला पूरी तरह कालेजों पर छोड़ा गया है। माना जा रहा है कि सभी कालेज पहले की तरह ऑफलाइन आवेदन ही लेंगे, यानी एडमिशन के फार्म जारी करेंगे।

यूटीडी में एडमिशन इस बार भी प्रवेश परीक्षा से, साइंस में कड़ा मुकाबला

पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की अध्ययन शालाओं (यूटीडी) में दाखिले के लिए इस बार फिर प्रवेश परीक्षा होगी। इसके लिए अगले महीने से आवेदन मंगाए जा सकते हैं। विश्वविद्यालय में पिछले दो-तीन बरसों से दाखिले के लिए यह सिस्टम अपनाया जा रहा है। हालांकि, इसके तहत साइंस में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों के बीच मुकाबला कड़ा रहता है। जबकि आर्ट्स की सीटों पर दाखिला होना उतना कठिन नहीं रहता है।

बेसिक साइंस परीक्षा 11 को : रविवि में सेंटर सीबीएस में भी दाखिले के लिए इस बार कड़ा मुकाबला होगा। इस सेंटर के लिए प्रवेश परीक्षा 11 जून को होगी। इस बार 70 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। पिछले साल 50 सीटें थीं। सीबीएस में फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ और फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायो ग्रुप का पांच वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसके छात्रों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह स्कॉलरशिप भी दी जाती है।

रविवि की अध्ययन शालाओं में ये कोर्स

केमिस्ट्री, पर्यावरण, बायोसाइंस, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, गणित, सांख्यिकी, आईटी, कंप्यूटर साइंस, भू-विज्ञान, एमएड., एलएलएम, बीए.एलएलबी, मनोविज्ञान, रूलर डेवलपमेंट, इकोनॉमिक्स, भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शन-योगा, बीपीएड, भाषा विज्ञान, हिंदी, छत्तीसगढ़ी, एमटेक, आप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स, एमलिब, एमएससी, बी.लिब समेत अन्य।

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