दुर्ग|कोतवाली थाना क्षेत्र में नाबालिगों की मानव तस्करी का संदिग्ध मामला अफवाह साबित हुआ है। बाल संरक्षण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने बच्चों के माता-पिता ने अतुल हलदर के साथ बच्चों को भेजने की बात स्वीकारी है। 17 मई को बैतूल निवासी अतुल हलदर अपने साथ गढ़चिरौली (गुजरात) से 21 आदिवासी लोगों को काम के लिए गुजरात ले जा रहा था, जिसमें 7 नाबालिग लड़कियां और एक लड़का था।
दुर्ग बस स्टैंड के पास सभी ऑटो में बैठकर रेलवे स्टेशन के लिए निकलने वाले थे। इतने बच्चों को देखकर पेट्रोलिंग टीम पूछताछ के लिए थाने ले गई थी। बताया जाता है कि गुरुवार दोपहर को जब सभी लोग स्टेशन के लिए ऑटो में बैठे थे। उस दौरान उन्हें एक मजिस्ट्रेट ने देख लिया। मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने कोतवाली थाने में सूचना दी। इस पर पेट्रोलिंग टीम ऑटो समेत उन्हें थाने ले गई। जब पुलिस अधिकारियों ने आदिवासी बच्चों से पूछताछ की तो न बच्चों को उनकी भाषा समझ आई और पुलिस को बच्चों की। हालांकि अतुल हलदर ने पुलिस को माता-पिता की मर्जी के उन्हें ले जाने की बात कही थी। लेकिन पुलिस मामला तब संदिग्ध लगा।
आधार कार्ड से हुई पहचान: कोतवाली पुलिस ने अतुल समेत 21 आदिवासी लोगों को पकड़ा था। इसमें 12 बच्चे नाबालिग दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें सीडब्ल्यूसी के हवाले कर दिया। उनमें से चार बच्चों के आधार कार्ड देखने पर उनके बालिग होने की जानकारी मिली। इस पर उन्हें बाल संरक्षण गृह और बाकी 8 में से 6 लड़कियों को सखी सहेली केंद्र भेज दिया।