बांधातालाब स्थित आनंद मधुकर रतन भवन में बच्चों के जैन शिक्षण एवं संस्कार शिविर का समापन हुआ। अंतिम दिन महासती डॉ. चंद्रप्रभा ने बच्चों को शिविर के दौरान सीखे संस्कारों को जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।
कहा कि जब भी घर पर कोई अतिथि आए तो उन्हें जय जिनेंद्र के उद्बोधन के साथ प्रणाम करें। प्रतिदिन घर में सभी बड़ों को नियमित रूप से प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेना न भूलें। इसे अपनी आदत बनाएं। आदर भाव ही आपके संस्कारों को सबसे बड़ा परिचायक है। बच्चों ने इस गुण को अपनाने संकल्प लिया। शिविरार्थी बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दो लघु नाटिका प्रस्तुत की। छोटे बच्चों ने संस्कार शिविर की तैयारी कैसे करें, इस विषय पर नाटिका का मंचन किया। श्रमण संघ के पदाधिकारी पदाधिकारियों की हूबहू नकल करते हुए संस्कार शिविर के आयोजन की प्रेरणा बच्चों ने दी।
बच्चों ने श्रमण संघ व साध्वियों की नकल कर संस्कार शिविर के आयोजन की दी प्रेरणा
दुर्ग के आनंद मधुकर रतन भवन में शिविर के अंतिम दिन जैन समाज के शिविरार्थी बच्चों के साथ-साथ उनके पालक भी उपस्थित रहे।
भावी पीढ़ी को तैयार करने यह आदर्श पहल: श्रीश्रीमाल
श्रमण संघीय धर्म सभा में निर्मल बाफना, प्रवीण श्रीश्रीमाल ने कहा कि समाज के बच्चों को संस्कारों की शिक्षा के लिए यह बड़ा कदम है। इससे हमारी भावी पीढ़ी भी धर्म, ध्यान के प्रति आसक्त रहेगी। संचालन मंत्री टीकम छाजेड़ व नवीन संचेती ने किया। जिनेंद्र वैद्य, नितिन संचेती, प्रकाश कांकरिया, आदित्य नाहर, संदीप बाफना आदि ने सहयोग दिया।
चार ग्रुपों में ये बच्चे बने विजेता
ग्रीष्म कालीन शिविर चार वर्गों ज्ञान ग्रुप, दर्शन ग्रुप, चरित्र ग्रुप, तप ग्रुप में आयोजित हुई। अंतिम दिन उसके परिणाम घोषित किए गए। ज्ञान ग्रुप में प्रथम स्थान पुष्पांजलि रावत, कल्प जैन, द्वितीय अमन चौरड़िया, संयमि पारख, तृतीय दर्शना चोपड़ा, वानया संचेती, दर्शन ग्रुप में प्रथम अक्षत छाजेड़, दीक्षा जैन, द्वितीय चिराग बाफना, सौम्या डाकलिया, तृतीय हर्षित बाफना, नयन बोहरा रहे। वहीं चरित्र ग्रुप में प्रथम दिव्या डाकलिया, द्वितीय मेहुल रुणवाल, तृतीय नैतिक बाफना और तप ग्रुप में प्रथम मौलिक पारख, द्वितीय यश बोहरा, तृतीय युक्ता बोहरा रहे।
जैन धर्म की शिक्षा देने वाले अध्यापकों का हुआ सम्मान
संस्कार पाठशाला में बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापकों को श्रमण संघ की ओर से सम्मानित किया गया। इनमें नीलू संचेती, प्रेरणा श्रीश्रीमाल, हर्षदा कर्नावट, मीना बाफना, चंदा रुणवाल, किरण संचेती, रोमा पारख, ममता कर्णावट, भूमिका संचेती, आरती पारख शामिल थे। संथारा साधिका माता स्व. त्रिशला देवी श्रीश्रीमाल की स्मृति में उनके पुत्र प्रवीण, प्रदीप आदि शामिल रहे।