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वन क्षेत्र बढ़ाने 1 लाख किसानों ने मांगे पौधे, लेकिन विभाग देगा सिर्फ 50 हजार

3 वर्ष पहले
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किसी भी प्रदेश या क्षेत्र में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र होना चाहिए। वर्तमान में जिले में एक प्रतिशत से भी कम वन क्षेत्र है। वनीकरण को बढ़ावा देने वन विभाग ने जिले के ग्रामीण इलाकों का सर्वे कराने के बाद 5 से 10 हेक्टेयर के तक तलाश किए। दुर्ग जिले के किसान खाली पड़ी जमीन पर पौधा लगाना चाहते हैं, मगर वन विभाग की उदासीनता के चलते उनका लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

मानसून करीब आने के बाद भी किसानों को प्राइवेट लैंड पर पौधरोपण करने निशुल्क पौधे नहीं मिले हैं। वृक्षारोपण को बढ़ावा देने वन विभाग ने मार्च में किसानों और आम नागरिकों से निशुल्क पौधा वितरण योजना के लिए आवेदन मंगाए थे। किसानों ने करीब एक लाख पौधों की मांग करते हुए आवेदन किया। आवेदन मंगाने के बाद किसान फारेस्ट विभाग के चक्कर काट रहे हैं। किसानों को पौधे का वितरण शुरू नहीं किया गया है। हाल ये है िक पौधे रोपने के लिए अभी तक किसानों ने गड्ढे खोदने का काम भी शुरू नहीं किया। इसको लेकर किसानों में भारी निराशा भी देखने को मिल रही है। जिसकी शिकायत भी करने की तैयारी है।

नदियों का कटाव रोकने शिवनाथ और खारुन नदी के दोनों ओर बांस के पौधे रोपने की योजना भी बनाई है।

अफसरों का दावा : बारिश से पहले बांट लेंगे जिले में 50 हजार पौधे

वन विभाग के अफसरों का कहना है कि किसानों की डिमांड के आधार पर इस साल 50 हजार पौधे बांटे जाएंगे। पौधों का वितरण शीघ्र शुरू किया जाएगा। बारिश शुरू होने से पहले किसानों को पौधों का वितरण कर दिया जाएगा। विभागीय अफसरों ने बताया कि इस साल जिले में कुल दो लाख पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों का रोपण जिले के चिन्हित स्थानों पर किया जाएगा।

पौधों की सुरक्षा पर ज्यादा फोकस

वन विभाग के उप वनमंडलाधकिारी डीके सिंह ने बताया िक वृक्षारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पौधों की सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग की जाएगी। छोटे पौधे रोपने पर इन्हें अ‌वारा मवेशी खा भी जाते हैं।

वन क्षेत्र बढ़ाने दो लाख पौधे तैयार किए: जिले का वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए फारेस्ट विभाग ने नर्सरी में दो लाख पौधे तैयार किए हैं।बारिश के दौरान फलदार पौधों के साथ बांस के पौधे बड़ी तादाद में रोपे जाएंगे। नदी तट पर वृक्षारोपण के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। वृक्षारोपण के लिए जगह की तलाश जारी है।

आवेदन का अब तक निराकरण नहीं हुआ

पूर्व पार्षद सुरेंद्र बजाज ने बताया कि उन्होंने वन विभाग के वर्कशाप में 10 हजार पौधों की डिमांड के लिए आवेदन किया था। आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अफसर कह रहे हैं कि आवेदन का निराकरण नहीं हुआ। जिसेक बाद ही पौधे मिल सकेंगे।

हरियाली योजना के तहत देना था पौधा....

मुफ्त में देना था पौधा: हरियाली प्रसार योजना के तहत हितग्राहियों को प्राइवेट लैंड पर नीलगिरी या मिश्रित प्रजाति के पौधे मुफ्त में दिए जाएंगे। सागौन, शीशम, आंवला, जाम, आम, इमली, बहेड़ा का रोपण करने निशुल्क पौधों का वितरण किया जाएगा।

एक पौधा पर एक रुपए अनुदान: पौधे रोपने के बाद अगले दो साल तक जीवित पौधों के आधार पर प्रति पौधा एक रुपए की दर से अनुदान मिलेगा। इसी तरह बाड़ी बांस योजना के तहत हर हितग्राही को बांस के पौधें निशुल्क वितरण किए जाएंगे।

बांस के लिए 5 रुपए अनुदान: बांस के पौधे रोपने के बाद जीवित बांस के पौधों के आधार पर प्रति पौधा 5 रुपए अनुदान मिलेगा। किसानों को विभाग से न तो बांस के पौधे मिले, न अन्य प्रजाति के पौधों का वितरण किया।

बारिश से शुरू होगा काम

शिवनाथ नदी के दोनों ओर बांस सहित अन्य प्रजाति के पौधे रोपने की तैयारी चल रही है। सभी इलाकों में बारिश से ठीक पहले पौधरोपण का काम शुरू होगा।अलग अलग प्रजाति के निशुल्क पौधा लोगों को दिया जाएगा। डी गणवीर, डीएफओ, दुर्ग

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