पूर्व सीईओ ने तीन महीने की एकसाथ भरी अटेंडेंस, फिर कर दिया रिलीव
जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक के पूर्व सीईओ एसके जोशी को अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने शुक्रवार को एक तरफा रिलीव कर दिया गया। वे बैंक में संवर्ग अधिकारी राज्य सहकारी बैंक थे। पूर्व में जोशी सीईओ भी रहे। जोशी 30 जनवरी से लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। वे 11 अप्रैल को अनाधिकृत रूप से बैंक के सीईओ के कक्ष में पहुंचे और जनवरी में 2 दिन व अप्रैल महीने में 2 से 10 अप्रैल तक हस्ताक्षर कर दिया। फिर अध्यक्ष ने जोशी को रिलीव कर दिया।
दो पेज के लेटर में अध्यक्ष ने ये सब लिखा, जानिए
1. रिलीविंग ऑर्डर: प्रीतपाल बेलचंदन की तरफ से दो पन्ने का लेटर जोशी को भेजा गया है। इसमें शिकायतों पर आपत्ति के साथ कार्यमुक्त किए जाने की बात कही गई है। कहा है कि जोशी की तरफ से 19 फरवरी तक मुक्त नहीं किए जाने की बात कही।
2. निवसकर को बनाया सीईओ: शीर्ष पर सीईओ पर नहीं बैठाए जाने को लेकर कहा गया कि 22 जनवरी को संचालक मंडल की बैठक में आरबीआई के फिट एंड प्रापर क्राइटेरिया के तहत पात्र मानते हुए निवसकर को सीईओ बनाया गया।
3. वाहन सुविधा: वाहन सुविधा से वंचित किए जाने को लेकर आपत्ति पर कहा गया कि बालोद में कार्यक्रम की वजह से वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। इसकी सूचना जोशी को दी गई। 10 अप्रैल से यह सुविधा उन्हें भी दी जा रही है।
4. बैंक में उपस्थित नहीं: 30 जनवरी से संवर्ग अधिकारी राज्य सहकारी बैंक के पद पर उनकी उपस्थिति बैंक में नहीं है। 11 अप्रैल को शाम 4 बजे बैंक का वाहन बुलाकर वे उपस्थित हुए। 10 अप्रैल के मध्य पंजी में हस्ताक्षर किया।
पहले भी रह चुके हैं बैंक के सीईओ
जोशी 30 मार्च 2007 से 15 जुलाई 2010तक पहले भी बैंक के सीईओ रह चुके हैं। 23 अगस्त 2017 को उन्होंने पुन: सीईओ का पद ग्रहण किया। 16 अक्टूबर को उन्हें पद से हटा दिया गया। कोर्ट के निर्देश पर 25 जनवरी को पदस्थ किया गया।
पंजीयक ने लिखा बैंक को पत्र
इधर इस पूरे मामले में 11 अप्रैल को ही संयुक्त पंजीयक सूर्यलाल विश्वकर्मा ने बैंक को पत्र लिखा। कहा कि सीईओ का कार्यभार जोशी को नहीं सौंपा गया है। ऐसे नहीं किए जाने पर अवमानना के लिए उन्हें उत्तरदायी होने की बात उन्होंने कही।
मेरा पक्ष सुनंे मुझे कैसे कर दिया रिलीव, यह गलत है...
बैंक में कोई बेइज्जत होने थोड़े जाएगा। कोर्ट का भी आदेश नहीं माना जा रहा। जहां मुझे पदस्थापना की बात कही जा रही वहां न चपरासी है, न ही कोई अधिकारी-कर्मचारी मुझसे मिलने आता है। रही बात कार्यमुक्त की, तो बिना मेरा पक्ष सुने मुझे कैसे रिलीव किया गया। यह प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के खिलाफ है। एसके जोशी, संवर्ग अधिकारी राज्य सहकारी बैंक
जोशी की कार्यप्रणाली को देखते लिया गया फैसला...
बैंक में असंवैधानिक कार्य किया गया। सीईओ के कक्ष में अनाधिकृत प्रवेश कर उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर किया जाना गलत है। पूर्व में वे 30 जनवरी से लगातार अनुपस्थित रहे। उनकी अन्य आपत्तियों को लेकर पहले भी जानकारी दी गई। उनकी कार्यप्रणाली को देखते हुए उन्हें रिलीव करने का निर्णय लिया गया। प्रीतपाल बेलचंदन, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक दुर्ग