सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकलेरा में इन दिनों मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से लोगों में समस्या बनी हुई है। सरकारी क्वॉर्टरों में रहने वाले डॉक्टर व नर्सेज के लिए भी पीने के पानी की समस्या है। पानी नहीं होने से सफाई करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉ. सत्येंद्र मीणा ने बताया कि जलदाय विभाग ने पिछले 10 सालों से हॉस्पिटल को पानी नहीं दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां 2 इंच का पाइप लगाया था, जो एनएच-52 के निर्माण के दौरान टूट गया। तब से पानी की ओर अधिक समस्या बनी हुई है। यहां दो नलकूप लगे हुए हैं। उनमें भी पानी सूख गया है। सोनोग्राफी मशीन व ब्लड बैंक नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ, शिशुरोग विशेषज्ञ, नेत्ररोग विशेषज्ञ, अस्थिरोग विशेषज्ञ नहीं है। इसके अलावा दंत रोग विशेषज्ञ महेश मीना को भी तीन वर्षों से डेपुटेशन पर झालावाड़ लगा रखा है। यहां मेल नर्स फस्टग्रेड के तीन पद, सैकंड ग्रेड नर्स के चार पद खाली चल रहे हैं। इनमें से 3 वेतन यहीं से उठा रहे हैं, जबकि कार्य अन्य जगह कर रहे हैं। यहां घाटोली, भालता, सरड़ा, कामखेड़ा, चुरेलिया, जावर, हरनावदा से प्रसव के लिए महिलाएं आती है। ऐसे में यहां सोनोग्राफी मशीन व ब्लड बैंक नहीं होने से ज्यादातर महिलाएं रिस्क नहीं लेते हुए निजी अस्पतालों में जाना पसंद करती है।