नगर निगम के कुछ अफसरों ने ऐसी दरियादिली दिखाई कि शहर की चार बड़ी फर्मों से महज 25 फीसदी शुल्क जमा कराने के बाद उनसे सीएलयू, सबडिवीजन, कन्वर्जन आदि शुल्क ही नहीं वसूला । इससे नगर निगम को 12 करोड़ 72 लाख 38 हजार रुपए की राजस्व हानि हुई। भारतीय लोक लेखा परीक्षक संस्थान की ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद निगमायुक्त ने योजना शाखा में तैनात रहे सीनियर टाउन प्लानर, डिप्टी टाउन प्लानर, असिस्टेंट टाउन प्लानर और चीफ टाउन प्लानर पर भ्रष्टाचार उन्मूलन और धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
भारतीय लोक लेखा परीक्षक संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक नेहरू ग्राउंड प्लॉट नंबर ए-6 के लिए राजेश कुमार भाटिया को मई 1996 में होटल बनाने के लिए सीएलयू दिया गया था। सीएलयू शुल्क के 6 लाख रुपयों में से 2.10 लाख रुपए ही जमा कराए गए। बाकी 6 समान किस्तों में अदा किया जाना था। दिसंबर 2009 में पहली किस्त जमा कराने के बाद होटल मालिक ने शुल्क देना बंद कर दिया। तब से मूलधन पर ब्याज लगकर यह रकम 3.6 गुणा बढ़कर 11293223 रुपए पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक तब से 2017 तक किसी भी अधिकारी ने न बकाया धनराशि मांगी और न कोई नोटिस जारी किया। इसी तरह अनखीर में डिलाइट गार्डन खोलने के लिए राजकुमारी भाटिया और ब्रजपाल सिंह को अक्टूबर 2014 में कंडीशनल सीएलयू जारी किया गया था। महिला को ईडीसी के रूप में 476.74 लाख रुपए जमा कराने थे। 25 फीसदी शुल्क जमा कराने के बाद महिला को बकाया राशि छह पाक्षिक किस्तों मेंं ब्याज सहित चुकानी थी। तीन किस्तें देने के बाद कंपनी ने शुल्क नहीं दिया। कंपनी पर 21006357 रुपए बकाया हैं। ललित होटल निर्माण के लिए मेसर्स एलपी हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने मार्च 1998 में इंडस्ट्रियल प्लॉट का व्यावसायिक प्लॉट में सीएलयू कराया था।