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स्मार्ट सिटी के बदहाल ग्रीनबेल्ट अब संवारेंगे निजी संस्थान, नगर निगम ने किया हैंडओवर

3 वर्ष पहले
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स्मार्ट सिटी की बदहाल ग्रीनबेल्ट की हालत सुधारने के लिए नगर निगम ने इन्हें निजी संस्थानों को हैंडओवर कर दिया है। कमिश्नर ने 26 संस्थानों को इनके आसपास की ग्रीनबेल्ट को डेवलप करने के लिए दे दिया है। ये संस्थान इन ग्रीनबेल्ट को डेवलप कर अपने-अपने नाम के बोर्ड लगाएंगे। निगम कमिश्नर का मानना है कि इससे शहर को काफी लाभ होगा।

ग्रीनबेल्ट व पार्क की डिटेल

नगर निगम का एरिया 207.88 स्क्वायर किलोमीटर है। इसमें 513 एकड़ में पार्क व ग्रीन बेल्ट डेवलप है। पार्कों की संख्या 615 है। इनमें से 400 के करीब पार्क खुद आरडब्ल्यूए मेनटेन करती है। इस वक्त पार्कों व ग्रीन बेल्ट की हालत काफी खराब है। कमिश्नर ने इस मामले को लेकर पिछले दिनों बागवानी ब्रांच के अधिकारियों की मीटिंग लेकर ग्रीनबेल्ट व पार्कों की स्थिति सुधारने के आदेश दिए थे। कमिश्नर मोहम्मद शाइन के मुताबिक अभी और बड़े स्तर पर प्लान तैयार किया जाएगा।

क्यों बनाई योजना

रोड किनारे बढ़ती जा रही आबादी के चलते वाहन चालकों को खतरा।

शहर में बढ़ता प्रदूषण।

शहर की खूबसूरती के लिए जरूरी।

रोड किनारे निर्माण मालिक तरह-तरह से ग्रीनबेल्ट पर कब्जा कर रहे हैं।

ग्रीनबेल्ट न होने से जगह-जगह गंदगी पड़ी रहती है।

क्या होगा लाभ:-

अब कब्जों का हमेशा के लिए सफाया हो जाएगा।

प्रदूषण के स्तर में सुधार हो सकेगा।

सड़क की सुंदरता बढ़ जाएगी।

वाहन चालक सुरक्षित सफर करेंगे।

- पौधे भी लगेंगे

गुलमोहर, पापड़ी, अमरताथ, पिल्कन, एसेसिमिया, पीपल, बड़, जटरौफा, बोगनवेलिया एवं महकने वाले फूलों के पौधे लगाए जाएंगे।

कैसे करेंगे प्रदूषण को कम

अधिकारियों के मुताबिक ग्रीनबेल्ट में लगने वाले पौधे प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होते हैं। ये पौधे धूल-मिट्टी व कार्बन डाइऑक्साइड को खींच लेते हैं।

फरीदाबाद. सेक्टर 18 की ग्रीन बेल्ट का हाल।

अभी शहर के क्या हैं हालात

शहर में ग्रीनबेल्ट का बुरा हाल है। सेक्टर-21ए में ग्रीनबेल्ट पर गोबर पड़ा रहता है। नेशनल हाइवे पर ग्रीनबेल्ट की जगह ढाबे चल रहे हैं। कई जगह ग्रीनबेल्ट पर दुकान, शराब के खोखे व रेहड़ी चालकों का कब्जा है।

नगर निगम कर्मचारी लापरवाह

निगम कर्मचारियों की लापरवाही के कारण आज ग्रीनबेल्ट और पार्कों की हालत खराब है। इस कारण अधिकतर पौधे बड़े होने से पहले ही मर जाते हैं। माली व चौकीदार अपना काम ठीक से नहीं करते। निगम की बागवानी ब्रांच के अधिकारी भी लापरवाही बरतते हैं। इस कारण ग्रीनबेल्ट व पार्क दम तोड़ते जा रहे हैं।

शहर में ऐसे अनेक संस्थान हैं जो शहर की भलाई के लिए आगे आना चाहते हैं। जब मैंने ग्रीनबेल्ट डेवलप करने की बात ऐसे कुछ संस्थानों के सामने रखी तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसलिए अब ऐसे 26 संस्थानों को इनके आसपास के ग्रीनबेल्ट को डेवलप करने के लिए हैंडओवर कर दिया है। अब यहां न कब्जा होगा और न गंदगी। ये संस्थान इन ग्रीनबेल्ट को मेनटेन करेंगे। आमजन का भी फर्ज बनता है कि वह शहर की हरियाली बचाने में हरसंभव सहयोग करें। -मोहम्मद शाइन, कमिश्नर, नगर निगम।

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