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अफसरों ने 8 साल में निगम के राजस्व में Rs.5.859 करोड़ का नुकसान पहुंचाया
नगर निगम योजना शाखा में भारतीय लोक लेखा परीक्षक संस्थान की जांच रिपोर्ट में 5.859 करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना शाखा में तैनात तत्कालीन कर्मचारियों ने जानबूझ कर आवेदकों से सीएलयू चार्ज, ईडीसी, आईडीसी, कन्वर्जन शुल्क आदि नहीं वसूले। निगम आयुक्त ने रिपोर्ट के आधार पर 1999 से लेकर 2017 तक योजना शाखा में तैनात रहे सीनियर टाउन प्लानर, डिप्टी टाउन प्लानर सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम सहित धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराने का आदेश दिया है।
नगर निगम की योजना शाखा में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर निगमायुक्त मो. शाईन ने भारतीय लोक लेखा परीक्षक संस्थान से शाखा की पुरानी फाइलों का ऑडिट कराया था। संस्थान ने 1999 की फाइलों की जांच की थी। इनमें चार फाइलों में 5.345 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी जमीन के लिए सीएलयू तभी जारी किया जा सकता है जब इस मद में पूरा शुल्क जमा करा लिया जाए। सेवानिवृत्त कर्नल एससी राय को बंगला प्लॉट 57सी की सीएलयू देने में पूरा शुल्क नहीं वसूला गया। आवेदक को सीएलयू जारी कर शुल्क जमा कराने के लिए समय दिया गया। समय निकलने के बाद भी शुल्क अदा नहीं किया गया। इसमें निगम को 12 लाख 22 हजार 908 रुपए की राजस्व हानि हुई। यमाहा चौक स्थित पियूष शेल्टर इंडिया ने 12888 वर्ग गज के प्लॉट में स्वीकृत 0.75 फ्लोर एरिया की जगह ढाई गुणा अधिक निर्माण करवा दिया था।
अधिकारियों ने कंपनी से कम दर पर वसूली की और बढ़े हुए एफएआर पर कोई शुल्क नहीं वसूला। इससे निगम को 59 लाख 10 हजार 618 रुपए की राजस्व हानि हुई। अचीवर्स बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड से भी एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज के 4 करोड़,64 लाख,13 हजार रुपए नहीं वसूले गए। इसी तरह मथुरा रोड स्थित मेसर्स इंडिया फोर्ज एंड ड्रॉप स्टैंपिंग लिमिटेड से भी कम दर पर ईडीसी शुल्क वसूला गया। इससे नगर निगम को 50 लाख,53 हजार,261 रुपयों की हानि हुई।
सीनियर टाउन प्लानर, डिप्टी टाउन प्लानर सहित अन्य अधिकारियों पर केस दर्ज कराने का आदेश