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दस में से पांच लोग होते हैं व्हाइट कोट हाइपरटेंशन का शिकार

3 वर्ष पहले
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यह सिर्फ एक नियमित स्वास्थ्य जांच है। घबराइए मत। अगर आपके डॉक्टर आपसे ऐसा कहते हैं और आपकी रक्तचाप की दोबारा जांच करते हैं तो आप ऐसे इकलौते व्यक्ति नहीं हैं। ऐसे कई व्यक्ति हैं जो अस्पताल या क्लिनिक में रक्तचाप की जांच के समय घबरा जाते हैं। विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने कहा कि रक्तचाप की जांच के दौरान अगर कोई मरीज घबराता है तो इससे रीडिंग गलत हो सकती है। इसे ‘व्हाइट कोट हाइपरटेंशन’ कहा जाता है। जब कोई डाॅक्टर किसी मरीज को देखता है, खास तौर पर जब मरीज के रक्तचाप की जांच करता है तो मरीज को एंग्जाइटी या स्ट्रेस होता है। यह व्हाइट कोट हाइपरटेंशन है।

विशेषज्ञों ने कहा कि रक्तचाप की जांच के दौरान अगर कोई मरीज घबराता है तो इससे रीडिंग गलत हो सकती है

ऐसे कराएं हाइपरटेंशन की जांच

डॉक्टर मरीज को घर पर ही रक्तचाप रीडिंग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इससे रक्तचाप की जांच उस समय होगी जब आप वास्तव में सक्रिय रहते हैं। यही नहीं इससे मरीज के बारे में ऐसी कई जानकारी मिलती हैं, जिससे यह समझा जा सकता है कि किस तरह से जीवन की छोटी सी छोटी असावधानी अगले दिन आपके रक्तचाप को प्रभावित करती है।

यह करीब 10 में से 5 व्यक्ति को होता है

विशेषज्ञों के मुताबिक व्हाइट कोट हाइपरटेंशन बहुत ही आम है। करीब दस में से पांच मरीज जब अस्पताल में रक्तचाप की जांच कराते हैं तो उनकी ज्यादा रीडिंग आती है। जबकि वही मरीज अपने घर पर रक्तचाप की जांच करता है तो उसकी रीडिंग नार्मल आती है। इसके कारण मरीज का गलत उपचार होने की आशंका रहती है। एक निजी अस्पताल के डॉ. जितेंद्र कुमार के मुताबिक जब आप चिंतित होते हैं तब आपका शरीर अधिक मात्रा में कैटेकोलामाइन्स उत्सर्जित करता है। इसके परिणामस्वरूप आपके हृदय की गति एवं रक्तचाप में बढ़ोतरी हो जाती है। कैटेकोलामाइन्स एड्रेनल ग्रंथियों द्वारा उत्पादित स्ट्रेस हार्मोन है। मानक यह है कि जब मरीज तनावमुक्त होता है उससे पांच मिनट के बाद तनावमुक्त अवस्था में ली गई रीडिंग के आधार पर ही यह माना जाना चाहिए कि उस व्यक्ति को अनियंत्रित रक्तचाप है। कई मामलों में 24 घंटे की मानिटरिंग के आधार पर की गई रक्तचाप की जांच उपयोगी साबित होती है।

व्हाइटकोट हाइपरटेंशन से कैसे करें बचाव

सबसे पहले यह सुझाव दिया जाता है कि मरीज को तनावमुक्त होना चाहिए। एक जगह से दूसरी जगह जाने पर आपको शांत होने में मदद मिलती है। स्वास्थ्य प्रदाता से इसके लिए कहें।

गहरी और धीमी सांस लेने से एंग्जाइटी को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कुछ लोग कविता या गीत को गुनगुनाने पर तनाव से छुटकारा पा सकते हैं।

बातचीत के विषय को बदलने से भी तनावमुक्त होने में मदद मिल सकती है। अगर बातचीत से आपका ध्यान बंटता है तो ऐसा करें।

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