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पानी को लेकर शहर डेंजर जोन में, निगम अधिकारी हरकत में आए, कई आरओ प्लांट, अवैध ट्यूबवेल व सर्विस स्टेशन सील

3 वर्ष पहले
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अंधाधुंध हो रहे पानी के दोहन के कारण शहर डेंजर जोन में पहुंच गया है। आलम यह है कि हर साल 10 फुट जलस्तर नीचे खिसक रहा है। पानी माफिया, आरओ प्लांट और सर्विस स्टेशन संचालक कमाई के चक्कर में जमकर पानी का दोहन कर रहे हैं। बिगड़ते हालात देख निगम कमिश्नर मोहम्मद शाइन ने अफसरों को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम जारी कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि गुरुवार को निगम के तीनों जोन में कई आरओ प्लांट, अवैध ट्यूबवेल व सर्विस स्टेशन सील कर दिए गए। यही नहीं कई के बिजली कनेक्शन भी काट दिए। पानी की लाइनें भी डिस्कनेक्ट कर दिए। निगम कमिश्नर ने तीनों जोन के ज्वाइंट कमिश्नर को निर्देश दिए अगर ऐसे मामलों में दोबारा पानी का दुरुपयोग होता दिखाई दे तो अब एफआईआर दर्ज कराई जाए।

पानी का हो रहा है दुरुपयोग

कमिश्नर के मुताबिक उनके संज्ञान में आया है कि कुछ निजी व्यावसायिक संस्थानों द्वारा वाहन धोने, आरओ प्लांट आदि में भारी मात्रा में पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है। निगम के अधिकारियों ने कई जगह अवैध रूप से चल रहे वाटर प्लांट व ट्यूबवेल उखाड़ दिए। तोड़फोड़ की कार्रवाई पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। चूंकि गर्मी के मौसम में पानी की डिमांड काफी बढ़ जाती हैं।

यहां हुई कार्रवाई

गुरुवार को सराय के झरिया मार्केट में दो अवैध वाटर प्लांट, मवई रोड, वजीरपुर, मास्टर रोड नजदीक बीपीटीपी के समीप तीन अलग-अलग अवैध ट्यूबवेल को उखाड़ दिया गया। इसके अलावा बड़खल में 6 आरओ प्लांट व ट्यूबवेलों के खिलाफ कार्रवाई कर इन्हें सील कर दिया गया। एनआईटी जोन में संजय कॉलोनी के 33 फुट रोड पर कई आरओ प्लांट सील कर दिए गए। बल्लभगढ़ जोन में छज्जूराम रोड पर आरओ प्लांट को सील कर दिया गया। एक साथ हुई इतनी बड़ी कार्रवाई से कई आरओ प्लांट संचालक अपनी दुकानें बंद कर फरार हो गए। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी तरह की पानी की बर्बादी बर्दाश्त नहीं होगी।

फ्री में पानी पीने वालों के कनेक्शन कटेंगे

नगर निगम का फ्री में पानी पी रहे एक लाख लोगों के घरों के कनेक्शन काटेगा। ऐसे अवैध कनेक्शन वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। निगम कमिश्नर ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कमिश्नर के मुताबिक अवैध कनेक्शनों की वजह से बिल भरने वाले लोगों को पानी नहीं मिलता। साथ ही निगम को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। अफसरों का मानना है कि कुछ लोगों ने मेन लाइन में कनेक्शन ले लिए हैं। जो गलत है। इससे पानी अन्य लिंक लाइनों में नहीं पहुंच पाता। इसलिए ऐसे कनेक्शन काटे जाएंगे।

भूजल का स्तर 450 फुट से भी नीचे

शहर के कई इलाकों में भूजल का स्तर 450 फुट से भी नीचे चला गया है। 9 साल पहले यमुना किनारे बसे गांव में जहां बीस फुट पर पानी आ जाता था, अब उन गांवों में भी 80 से 90 फुट की गहराई पर जलस्तर है। निगम के अधिकारियों ने बीते सालों में शिवदुर्गा विहार इलाके में पानी के बोरवेल लगाने के लिए 450 फुट से अधिक गहराई तक पानी खोजा लेकिन पानी नहीं मिला। इसलिए हालात गंभीर होते जा रहे हैं।

ऐसे रुक सकता है जलस्तर

अवैध बोरिंग बंद होने चाहिए।

प्रयोग के बाद बचे पानी को रिसाइकिल कर जमीन के नीचे पहुंचाए।

कंपनी, वर्कशाप व अन्य संस्थानों से प्रदूषित पानी को जमीन के नीचे न डाला जाए।

आमजन पानी की बर्बादी रोके।

लोग हर दिन पानी को हार्वेस्ट करें।

हार्वेस्टिंग सिस्टम को सख्ती से लागू किया जाए।

पेयजल के लिए अलग पाइप लाइन से पानी आपूर्ति किया जाए।

अन्य कार्यों के लिए रिसाइकिल किया हुआ पानी दूसरी पाइप लाइनों से आपूर्ति किया जाए।

पानी रिसाइकिल के प्लांट अधिक लगें।

बारिश और बाढ़ के दिन में यमुना और नहरों में आने वाले पानी को झीलों में एकत्र करने की व्यवस्था की जाए।

शहर में पेयजल की स्थिति

प्रति व्यक्ति 172 लीटर पानी की आवश्यकता

15 लाख आबादी

शहर में 270 मिलियन लीटर प्रतिदिन की मांग

दिल्ली से सटे हुए इलाके नंबर वन

अवैध बोरिंग के मामले में दिल्ली से सटे हुए इलाके इस समय नंबर वन हैं। फरीदाबाद और दिल्ली के इलाके में 100 से अधिक कॉलोनियां बसी हुई हैं। इन कॉलोनियों में गर्मी के सीजन में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। बस इसी बात का फायदा पानी माफिया उठा रहे हैं। सराय ख्वाजा थाना एरिया के इलाके में छोटी-छोटी कॉलोनियों में सैकड़ों अवैध बोर हैं। इनसे रातोंरात सैकड़ों टैंकर पानी दिल्ली की कॉलोनियों में जाता है। इसके अलावा सूरजकुंड, अनखीर, अनंगपुर, दयालबाग, सेहतपुर, तिलपत, तिगांव रोड, दुर्गा बिल्डर, हरकेश नगर, बदरपुर बॉर्डर से सटे इलाके, नहरपार, सेक्टर-12 से लेकर सेक्टर-9 तक बाइपास रोड व सेंट्रल थाना इलाके में भी अवैध बोरिंग कर माफिया पैसा बना रहे हैं।

ये है कारण

बढ़ती आबादी और अवैध जलदोहन।

पेड-पौधों को काटकर इमारतें बनाना।

गांव से लेकर शहर तक तालाब खत्म कर मिट्टी से भरना।

गांव से लेकर शहर तक मिनरल वाटर प्लांट की संख्या लगातार बढ़ना।

220 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई प्रतिदिन

5 रैनीवेल से सप्लाई

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