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3 साल बाद फिसड्‌डी का दाग हटा

3 वर्ष पहले
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की दसवीं परीक्षा में जिले ने तीन साल बाद फिसड्‌डी का दाग तो हटाया, लेकिन फेल स्टूडेंट्स की संख्या में कोई नहीं आई। इस बार भी परीक्षा में शामिल होने वाले आधे स्टूडेंट्स ही पास हो पाए। परीक्षा में जिले ने 22वें स्थान से 19वां स्थान हासिल किया है। कुल पास प्रतिशत में पिछले साल की तुलना में जिले की परीक्षा परिणाम में चार प्रतिशत का सुधार हुआ। जबकि तीन साल बाद पांच प्रतिशत का सुधार नजर आाया। जिले का ओवरआल परिणाम 42.63 रहा। जो पिछले वर्ष 38.80 था। वहीं गर्ल्स का पास प्रतिशत ब्वायज के मुकाबले बेहतर रहा। ब्वायज का पास फीसद 38.76 रहा। जबकि गर्ल्स का पास प्रतिशत 47.32 रहा। बारहवीं के परीक्षा परिणाम में सुधार आने के बाद दसवीं के परिणाम को लेकर भी उत्साह था। जिले के कुल 22 हजार 641 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे। जिनमें से केवल नौ हजार छह सौ इक्यावन स्टूडेंट्स ही पास हो पाए। जबकि पिछले वर्ष 20 हजार 498 स्टूडेंट्स में से 7954 स्टूडेंट्स ही पास हो पाए थे।

विभाग करे आत्ममंथन

शिक्षाविद् दुष्यंत कुमार के अनुसार पिछले साल भी परीक्षा में शामिल आधे स्टूडेंट्स फेल हो गए थे। विभाग के अधिकारियों को स्कूल प्राचार्यों के साथ बैठक करके फेल होने के कारण खोजने होंगे। जिन्हें समय रहते दूर करना होगा। शिक्षा विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद भी परीक्षा परिणाम में कोई ठोस सुधार नहीं हो रहा है। शिक्षािवद् डीसी चौधरी बताते हैं शिक्षा के अधिकार कानून का सही से पालन नहीं होने के कारण स्थिति खराब होती जा रही है। वह बताते है कि आरटीई के तहत हर किलोमीटर पर एक स्कूल होना चाहिए। 30 बच्चों पर एक शिक्षक नियुक्त होना चाहिए। आठवीं क्लास तक किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन अभी सरकार ने स्कूल तो खोल दिए है, लेकिन स्कूलों में स्टाफ ही पूरा नहीं है। इसके अलावा स्टूडेंट्स को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इन व्यवस्थाओं में सुधार करना सबसे जरूरी है।

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