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सुरक्षा पर सवाल: पौना घंटा लिफ्ट में फंसी रही महिला व बच्चा, गार्ड था गायब
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-77 की सोसायटी पार्क फ्लोर में रहने वाली एक महिला और बच्चा सोमवार देर शाम लिफ्ट में 45 मिनट तक फंसे रहे, लेकिन सोसायटी के गार्ड और मेंटिनेंस कर्मचारियों का अता-पता नहीं था। चीख पुकार सुन सोसायटी के लोग इकट्ठा हो गए। पुलिस को सूचना दी, लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई। आखिर में सोसायटी के लोगों ने ही प्रयास कर बड़ी मुश्किल से लिफ्ट में फंसी महिला और बच्चे को बाहर निकाला। पुलिस को सूचना देने के बाद भी मौके पर पहुंचने में उसे 45 मिनट लग गए। पुलिस सोसायटी का रास्ता तक नहीं ढूंढ पा रही थी। पार्क फ्लोर की आरडब्ल्यूए ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और बिल्डर कंपनी पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। करीब एक घंटे तक सोसायटी में अफरा-तफरी का माहौल था।
बीपीटीपी कंपनी ने पार्क फ्लोर सोसायटी बनाई है। पांच मंजिला इस सोसायटी में अभी 180 परिवार रहते हैं। जयदीप अरोड़ा का परिवार ग्राउंड फ्लाेर पर रहता है। सोमवार देर शाम उनकी प|ी रमा अरोड़ा और एक बच्चा किसी काम से लिफ्ट के जरिए थर्ड फ्लोर पर जा रही थीं। बताया जाता है लिफ्ट जैसे ही थर्ड फ्लोर पर पहुंची उसका गेट नहीं खुला। जयदीप अरोड़ा ने बताया कि उनकी प|ी ने लिफ्ट में लगी बेल को बजाती रहीं, लेकिन वह भी काम नहीं कर रही थी। काफी देर से लिफ्ट एक ही जगह फंसने और गेट न खुलने से उनकी सांसें फूलनी शुरू हो गई थीं।
45 मिनट तक सोसायटी ढूंढती रही पुलिस
जयदीप अरोड़ा के अनुसार सोसायटी के लोगों ने घटना की सूचना रात 8.30 बजे पुलिस के 100 नंबर पर की, लेकिन पीसीआर 45 मिनट बाद 9.15 बजे सोसायटी पहुंची। जब लोगों ने लेट पहुंचने का कारण पूछा तो पुलिसकर्मियों ने सोसायटी के बारे में जानकारी न होना बताया। ऐसे में सवाल यह उठता है यदि इमरजेंसी में किसी को पुलिस की मदद की जरूरत पड़े तो उसे मदद नहीं मिल सकती। ललित इंदौरिया के अनुसार घटना के बारे में मैनेजमेंट को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। घंटेभर बाद कंपनी के अधिकारी मौके पर आए। उधर कंपनी के साइट मैनेजर तरनदीप का कहना है कि चेंज ओवर में तकनीकी खराबी आने से तीन ब्लाक के लिफ्ट में समस्या आई थी। सूचना मिलने पर हम मौके पर पहुंच गए। लिफ्टमैन किसी दूसरी लिफ्ट को देख रहा था। उन्होंने कहा महिला को महज 8 से 10 मिनट में बाहर निकाल लिया गया था।
सोसायटी के लोगों ने मशक्कत के बाद निकाला बाहर
करीब 45 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रमा अरोड़ा ने लिफ्ट का दरवाजा अंदर से पीटना शुरू किया। लिफ्ट से आवाज आने पर सोसायटी में रहने वाले लोग जमा हो गए। एक-दूसरे को सूचना देकर पहले तो कुछ लोग बीपीटीपी कंपनी के मेंटिनेंस कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। वापस आकर लोगों ने लिफ्ट के गेट को खोलना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद गेट खुल पाया। रमा अरोड़ा अौर बच्चे को बाहर निकाला। आरडब्ल्यूए के महासचिव ललित इंदौरिया का कहना है कि बिल्डर की लापरवाही से यह समस्या हुई। यहां न कोई लिफ्टमैन है और न सुरक्षा गार्ड। ऐसे में किसी की जान भी जा सकती है।