‘वाहु वाहु गोबिंद सिंह आपे गुरु चेला’
फतेहाबाद | गुरु गोबिंद सिंह ने जब देश और धर्म की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना की तो उन्होंने अमृत छकाकर पांच प्यारे बनाए उन्हीं को ही खुद के लिए अमृत छकाने की बात कही। ये बात चंडीगढ़ के भाई गुरप्रीत सिंह रागी जत्था ने शब्द कीर्तन के माध्यम से बताई। वो बैसाखी पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा सिंह सभा में आयोजित समागम में उपस्थित गुरु की संगत को गुरुओं के इतिहास बारे बता रहे थे।
उन्होंने कहा कि गुरु जी ने जब खालसे बनाए तो गुरु जी ने कहा था कि मुझे पांच ऐसे सेवक चाहिए जोकि अपने जीवन की कुर्बानी दे सकें। तब जो लोग आगे आए आज भी हम उनको गुरु के प्यारे कहते हैं। गुरु जी ने उनको खालसा बनाकर देश और पंथ की रक्षा के लिए कहा। आज भी हम उन गुरु के प्यारों का सम्मान करते हैं। इस अवसर पर कुलवंत सिंह जोहल, महेंद्र सिंह ग्रोवर, अवतार सिंह, कुलबीर सिंह, अजीत सचदेवा, मनसाराम आिद उपस्थित थे।