‘रामायण पाठ से मिलती है मन को शांति’
ठाकर बस्ती स्थित हनुमान मंदिर में रविवार को श्रीरामायण पाठ का भोग डाला गया। इससे पूर्व श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ में आहुति डालकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद महिला श्रद्धालुओं द्वारा राम-नाम का कीर्तन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि समाजसेवी देवीदयाल तायल थे। जबकि विशिष्ट अतिथि राजन ग्रोवर थे।
तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में मंदिर के पुजारी शेषधर त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीरामचंद्र की महिमा का बयान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम चंद्र ने कभी किसी के साथ अन्याय नहीं किया है। इसलिए आज जगत उनको मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से जानता है। उन्होंने कहा कि रामायण के पाठ से मन को शांति मिलती है। कीर्तन के दौरान राम-नाम की माला, आज हनुमान जी आएंगे, बोलो जय श्रीराम, लाल लंगोटा हाथ मे सोटा, करेंगे राम जी बेड़ा पार भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस अवसर पर ओमप्रकाश भाटिया, किशोरीलाल नारंग, दौलतराम मेहता, अशोक मेहता, प्रेम तनेजा, खेमचंद वधवा, डॉ. दुर्गा सोनी, जगदीश तनेजा, कौशल नारंग, देवी चंद नारंग, नरेश मैदान, जय चंद बजाज, पूर्ण डुरेजा, लाभचंद नारंग, वीनू तनेजा, संतोष डुरेजा, देव चोपड़ा, बिट्टू सैनी, विजय तनेजा, पूजा तनेजा आदि उपस्थित थे।
फतेहाबाद। ठाकर बस्ती स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं।
खुद के लिए शांति चाहते हो तो दूसरों की शांति भंग मत करो : जैन मुनि
रतिया | रतिया में विराजमान वरिष्ठ जैन संत प्रवचन भास्कर, अजीत मुनि महाराज, नवीन मुनि महाराज व चिंतन मुनि महाराज अपने अल्प समय के प्रवास के बाद 16 अप्रैल को रतिया से भूना के लिए पद विहार करेंगे। सोमवार को जैन संत रतिया से भूना रोड पर 6 किलोमीटर दूर बाबा केवल सिंह बांगड़ की ढाणी में रुकेंगे और साथ ही 17 अप्रैल को यहां से पद विहार करते हुए ग्रिड ढाणी में पहुंचेंगे। जैन मुनियों ने रविवार को जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए कहा कि अगर खुद के लिए शांति चाहते हो तो दूसरे की शांति भंग मत करो। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने लिए सुख और शांति पूर्वक जीवन जीना चाहता है लेकिन वह इसके लिए दूसरों की शांति भंग करने से भी गुरेज नहीं करता जो कि अन्याय है।
रतिया। जैन स्थानक में जैन संतों के प्रवचन सुनती महिलाएं
शास्त्रों में सोमवती अमावस्या का बड़ा महत्व: शास्त्री
टोहाना| सोमवती अमावस्या का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। इसलिए सभी को इस दिन पूजा अर्चना कर लाभ लेना चाहिए। यह बात प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर के पुजारी शिव कुमार शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि कालसर्प दोष से पीड़ित जातको को भगवान शिव के प्रतिरूप शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, गुड़, गंगाजल, फल, फूल व नाग नागिन का जोड़ा अर्पण करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा धन धान्य की वृद्धि होती है।
शास्त्री ने बताया कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व बताते हुए कहा था कि इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों का तर्पण करने से मनुष्य समृद्ध व स्वस्थ होता है।