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प्राइमरी स्कूल की 22 सालों से बरामदों में लग रहीं कक्षाएं, मई से नए भवन में पढ़ेंगे विद्यार्थी

3 वर्ष पहले
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शहर के बीचों-बीच शिव चौक में स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल में पिछले 22 सालों से बरामदों में प्राइमरी विंग की कक्षाएं लगती आ रही हैं। पूरे स्कूल में महज 5 कमरे हैं। इन कमरों में 6वीं से 10वीं तक की सीनियर छात्राओं की कक्षाएं लगती हैं। अध्यापकों के लंबे संघर्ष के बाद शिक्षा विभाग ने अब इस स्कूल की प्राइमरी विंग को पास के ही राजकीय प्राइमरी स्कूल-2 (मस्जिद वाले स्कूल) में शिफ्ट करने के आदेश जारी किए हैं। नए सत्र की शुरुआत के साथ ही 130 विद्यार्थी एक मई से अपनी-अपनी कक्षाओं में ही पढ़ेंगे। यह आदेश बच्चों व अभिभावकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

शिव चौक में रघुनाथ मंदिर के समीप 1955 में भानूराम चुघ ने 22 मरले में प्राइमरी स्कूल बनवाया था। जो समय के साथ अपग्रेड होते-होते वर्तमान में गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल बन गया। स्कूल में वर्तमान में 375 छात्र-छात्राएं है। प्राइमरी विंग में पहली से 5वीं तक के 130 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने इस स्कूल को करीब 1990 में अपग्रेड कर डबल शिफ्ट में शुरू कर दिया। लेकिन 2004 में एजुसेट सिस्टम शुरू होने के बाद डबल शिफ्ट को बंद कर पूरे स्कूल को एक ही शिफ्ट में चलाया जा रहा है। तभी से प्राइमरी विंग के बच्चे पूरा साल बरामदों में ही टाट बिछाकर पढ़ाई करते आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि प्राइमरी विंग का अपना कोई ऑफिस भी नहीं है।

फतेहाबद। भीमा बस्ती स्थित प्राइमरी स्कूल में बरामदे में पढ़ते बच्चे।

जगह की कमी के कारण नए बच्चे नहीं लेते एडमिशन : इंचार्ज

स्कूल की इंचार्ज सीमा का कहना है कि वर्तमान में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार कक्षाएं नहीं है। इसका सीधा-सीधा असर शैक्षणिक सत्र की शुरुआात में पड़ता है। नए बच्चे स्कूल में एडमिशन नहीं लेते। यही कारण है कि स्कूल को 30-40 नए बच्चों के एडमिशन का नुकसान होता है।

एक मई से नए स्कूल में लगेगी कक्षाएं : बीईओ

बीईओ कुलदीप सिहाग ने बताया कि जीजीएचएस में जगह के अभाव के चलते प्राइमरी विंग को मस्जिद वाले स्कूल में शिफ्ट किया है। इस स्कूल के 130 बच्चे एक मई से नए सत्र की कक्षाएं वहां लगाएंगे।

विभाग करेगा पहल : डीईईओ

डीईईओ संगीता बिश्नोई ने बताया कि जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार जगह का अभाव है। उन स्कूलों को लेकर जल्द ही विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को सुविधाओं के साथ अच्छी शिक्षा मिले।

स्कूल के बरामदों में गर्मी-सर्दी से बचाने के लिए चटाई बनती सहारा

गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल के बरामदों में बच्चों को गर्मी-सर्दी से बचाने के लिए चटाई ही सहारा बनी हुई है। अध्यापकों ने अपने स्तर पर पहल करते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को देखते चटाई लगवाई हुई है। चटाई ही बच्चों को गर्मी में लू और सर्दी में ठंड से बचाती है।

लेवल नीचा होने से बरसात में स्कूल में भरता है पानी, नहीं लगती कक्षाएं

स्कूल का लेवल गली के बराबर होने के कारण बरसात के दिनों में अक्सर पूरा स्कूल पानी से घिर जाता है। प्रांगण से लेकर बरामदों तक पानी ही पानी रहता है। बरसात का सबसे ज्यादा नुकसान प्राइमरी विंग के बच्चों को उठाना पड़ता है। पानी भरने के कारण प्राइमरी विंग की कक्षाएं नहीं लग पाती है।

अध्यापक नेता ने उठाई थी आवाज

करीब 3 साल पहले अध्यापक नेता राजपाल मिताथल ने इस स्कूल से प्राइमरी विंग को अलग करने की मांग की थी। काफी प्रयास के बाद भी काेई सार्थक परिणाम नहीं सामने आया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को स्कूल को शिफ्ट करने के साथ-साथ पुरानी कोर्ट में प्रस्तावित एक एकड़ 9 कनाल भूमि पर सरकारी स्कूल बनाना चाहिए। राजपाल मिताथल के बाद जीजीएचएस के प्रिंसीपल हरेंद्र सिंह ने भी कई बार चिट्ठियां लेकर अधिकारियों से इस स्कूल को शिफ्ट करने की मांग की। 31 मार्च 2018 को हरेंद्र सिंह के रिटायर होने के बाद अब विभाग ने इसे स्वीकृति दी है।

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