भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने रविवार को इन पुलों का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि यह शहर वासियों के लिए नई सौगात होगी। सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर फूल सिंह नैन ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टोहाना विधान सभा क्षेत्र में अब तक सिंचाई विभाग द्वारा 18 करोड़ 86 लाख रुपये की धनराशि से विभिन्न विकास कार्यों को पूरा करवा दिया गया है तथा 7 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि से 14 वाटर कोर्स की भी मंजूरी दे दी गई है। इस अवसर पर अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्नोई, कार्यकारी अभियंता धूप सिंह, निगरानी समिति संयोजक नरेंद्र गर्ग बंटू, नप चेयरमैन कुलदीप सिंह, चेयरमैन सरदारी लाल, कृष्ण नैन सहित अन्य मौजूद रहे।
जर्जर होने लगे थे पुल
अनाज मंडी व रेलवे स्टेशन के पास स्थित उक्त दोनों महत्वपूर्ण पुल करीब चौसठ वर्ष पूर्व 1954 में अस्तित्व में आए थे। उस समय यहां हिमाचल के भाखड़ा डैम से नहरें आई थीं। समय के साथ-साथ शहर का विकास हुआ तथा नहर के दोनों ओर पूरी आबादी हो गई। अब आलम ये रहता है कि ये पुल चौबीस घंटे व्यस्त रहते हैं। इतने वर्षों में इन पुलों के ऊपर से अनगिनत वाहन गुजर चुके हैं जिस कारण अब ये पुल जर्जर होने लगे थे। जिसका संज्ञान लेते हुए विभाग ने समय रहते यहां पर नए पुल बनवाने का निर्णय लिया।
घग्गर नदी पर बनने वाले पुलों को लेकर फैसला कल
बलदेव बरेटा / रतिया | गांव खाई व कलोठा के बीच करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले घग्गर नदी के पुल का काम जमीन अधिग्रहण मामले को लेकर फिर से अटक गया है। पुल की घोषणा सीएम मनोहर लाल ने रतिया में साल 2016 में हुई रैली में की थी। दो सालों के दौरान अभी तक अधिकारी सिर्फ मौके का जायजा ही ले पाए हैं, लेकिन निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले पुल की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की थी। तब भी गलत घोषणा के कारण पुल का काम अटक गया था। क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के लोग वर्षों से घग्गर नदी पर गांव खाई व कलोठा के बीच पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। मौजूदा समय में रतिया क्षेत्र में घग्गर नदी पर 50 किलोमीटर के दायरे में रतिया बुढ़लाडा पर एक ही पुल है। नदी पर दो अन्य पुल ग्रामीणों द्वारा गांव अलीका व ढाणी बबनपुर में अपने स्तर व निजी सहयोग से बनाए हुए हैं। पुल का काम अटकने के कारण ग्रामीण भी निराश हैं। इसे लेकर आगामी 22 मई को बैठक बुलाई गई है।
गांव खाई व कलोठा के बीच पुल न होने के कारण आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को एक दूसरे गांव में जाने के लिए मात्र आधा किलोमीटर के रास्ते को तय करने के लिए रतिया या अलीका के रास्ते से आने जाने पर 50 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। अक्सर नदी में पानी चलता रहता है। जब पानी कम होता है, तब लोग ट्यूब व अन्य साधनों से नदी के बीच से निकल जाते हैं, लेकिन जब नदी उफान पर होती है, तब निकलना मुश्किल होता है। इसके अलावा नदी के बीच में से वाहन नहीं गुजर पाते। गांव लाली, लालवास, कलोठा, खाई, महमदकी, बोड़ा, बलियाला, मिराना गांवों के लोग कई बार पुल की मांग कर चुके हैं।
बीएंडआर के एसडीओ आरके मेहता ने कहा कि सात सड़को व पुल का काम किसानों द्वारा जमीन के अधिक रेट मांगने को लेकर रुका हुआ है। मामले को लेकर रतिया में बैठक बुलाई गई है। बैठक में किसान व विभागों के अधिकारी शामिल होगे जिसमें हल निकाला जाएगा ताकि सीएम घोषणा के अनुसार काम शुरू हो सके।
सीएम ने की थी घोषणा, दर्जन भर गांवों को जोड़ने के लिए खाई में बनना है 14 करोड़ का पुल
गांव कलोठा व खाई के बीच घग्गर नदी का वह हिस्सा जहा पुल बनना है।
प्रशासन बैठक में निकालेगा समाधान
प्रशासन ने सात सड़कों व पुल मामले में ग्राम पंचायतों, सरपंचों, किसानों व अधिकारियों की 22 मई को रतिया में बैठक बुलाई है। बैठक में एसडीएम, जिला राजस्व विभाग, पंचायती विभाग, बीएंडआर विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। जिसमें उक्त जगह को लेकर किसानों से बातचीत होगी, ताकि किसान कलेक्टर रेट पर विभाग को जगह दे और सड़कों व पुल का काम शुरू हो सके।
सात सड़कों का काम भी अधिग्रहण के कारण अटका
पुल के साथ साथ क्षेत्र की 7 सड़कों का काम भी जमीन अधिग्रहण के कारण सालभर से अटका हुआ है। बीएंडआर विभाग को उक्त सात सड़कें बनाने के लिए 33-33 फुट जगह की जरूरत है, जबकि रोड 30 से 31 फुट चौड़े हैं। इसके लिए सड़कों के किनारे विभाग ने एक-एक फुट जमीन अधिग्रहण करनी है, लेकिन किसान उक्त जगह को लेकर किसान विभाग से अधिक कीमत मांग रहे हैं, लेकिन विभाग कलेक्टर रेट पर जमीन देने के लिए राजी है।