भास्कर न्यूज| सिरसा/ डिंग मंडी
डिंग मंडी में रेलवे अंडरपास से पानी निकासी का प्रबंध सालों से नहीं है, मामूली बारिश भी लोगांे के लिए परेशान का सबब बन जाती है। लेकिन संबंधित विभाग गंभीर नहीं है। पिछले दिनों हुई बरसात से अंडरपास में पानी जमा है। जिसमें शुक्रवार शाम हरियाणा रोडवेज डिपो सिरसा की सवारियों से भरी एक बस फंस गई। चालक- परिचालक ने बस को निकालने के घंटों प्रयास किए। मगर नाकामयाब ही रहे, तो डिपो में फोन किया, उसके बाद बुल्डोजर की मदद से बस को बाहर निकाला। इस दौरान बस में सवार यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
रोडवेज डिपो की एक बस शुक्रवार शाम सिरसा से डिंग मंडी के रवाना हुई थी। जिसमें 19 सवारियां सफर कर रही थी। यह बस डिंग अंडरपास से गुजरते समय उसमें जमा पानी व गाद में धंस गई। घंटों बस को अंडरपास से निकालने के प्रयास हुए। लेकिन सवारियों से भरी बस अंडरपास से नहीं निकली, तो बस चालक ने डिपो में डीआई राकेश कुमार को इसकी सूचना दी। जिसके बाद बुल्डोजर की मदद से बस ढाई घंटे में बाहर निकाली जा सकी, तो उसमें सवार महिला एवं पुरुष यात्रियों ने राहत की सांस ली।
डिंग मंडी । रेलवे अंडरपास में फंसी रोडवेज की बस को क्रेन की सहायता से निकालने का प्रयास करते ग्रामीण।
पिछले साल पानी में डूब गई थी रोडवेज की बस
इसी तरह 30 जुलाई 2017 को हुई बरसात से अंडरपास से गुजरती फतेहाबाद डिपो की बस डूब गई थी, क्योंकि बरसात शुरू हुई कि सवारियों से भरी बस अंडरपास क्रॉस करते समय खराब हो गई थी। उसके बाद तेज बरसात का पानी अंडरपास में जमा होता रहा। जिसमें खराब खड़ी सवारियों से भरी बस ऊपर तक डूब गई थी। जिसको ट्रेक्टरों की मदद से खींचकर बाहर निकालना पड़ा था। आलम यह है कि यह अंडरपास में अक्सर बरसाती दिनों में लोगों की परेशानी बढ़ाता है। ग्रामीणों व आसपास के लोगों की मांग है कि इस अंडरपास से बरसाती पानी निकासी का उचित प्रबंध रेलवे करवाए।
पानी निकासी का नहीं कोई प्रबंध
डिंग मंडी में तीन साल पहले रेलवे ने अंडरपास का निर्माण करवाया था। लेकिन बरसाती पानी निकासी का कोई स्थाई प्रबंध अभी तक नहीं हो पाया है। हालांकि रेलवे पानी निकासी को बोर लगवाता है, जो कि फेल हा़े जाते हैं। मामूली बरसात का पानी भी अंडरपास में जमा होता है। यह समस्या यहां से आवागमन करने वाले वाहन चालकों के लिए सिर दर्द बनी है। अक्सर इसमें भारी वाहन फंस जाते हैं और आमजन को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।