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सरकार ने दिए नगर परिषद अधिकारियों को आदेश- 5 जून तक प्रदेश हो पॉलीथिन मुक्त

3 वर्ष पहले
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सरकार ने फतेहाबाद जिले को ग्रामीण इलाके में पहला पॉलीथिनमुक्त जिला माना है। हर जिले को अब पॉलीथिनमुक्त करने की सरकार ने ठान ली, लेकिन टाइमिंग गलत हो गई है। चूंकि एक तरफ तो जहां प्रदेशभर के सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं तो दूसरी तरफ सरकार ने आदेश जारी कर दिए है कि 5 जून तक प्रदेश पॉलीथिनमुक्त होना चाहिए। इसको लेकर नगर परिषद अधिकारियों को सरकार ने पत्र भी जारी कर दिया, लेकिन सरकार के आदेशों को लेकर नगर परिषद अधिकारी मुश्किल में पड़ गए है कि कर्मचारी के हड़ताल पर रहने के चलते वह कैसे अपने-अपने जिलों को पॉलीथिनमुक्त करेंगे।

पॉलीथिन में दिया सामान तो लगेगा 500 रुपये जुर्माना

नगर परिषद अधिकारियों ने सरकार द्वारा दिए गए आदेशों को लेकर प्लानिंग तो कर ली, लेकिन काम नहीं कर पा रहे हैं। अब तक की गई प्लानिंग के अनुसार नगर परिषद अधिकारियों ने यह निर्णय लिया है कि अगर कोई पॉलीथिन में सामान देता हुआ मिला या कोई पॉलीथिन बेचता हुआ मिला तो उस पर 500 रुपये जुर्माना देना होगा। अगर दोबारा पॉलीथिन मिला तो जुर्माना डबल हो जाएगा और तीसरी बार में रेहड़ी व दुकान में रखा सामान जब्त नगर परिषद कर सकती है।

रिसाइकिल करवाना होगा पॉलीथिन, होगी मुनियादी

जिले में कितनी पॉलीथिन बेचने की दुकान है। यह संख्या नगर परिषद के अधिकारी पता लगाएंगे। इसके बाद शहर में मुनियादी करवाई जाएगी कि कोई भी पॉलीथिन का यूज न करने व न बेचने संबंधित जागरूक किया जाएगा। वही पॉलीथिन बेचने वाले दुकानदारों को चेतावनी दी जाएगी। अगर पॉलीथिन बेचा तो कार्रवाई होगी। वही दुकानदार को कहा जाएगा कि वह दुकान में रखा हुआ पॉलीथिन रिसाईकिल करवाएं। उसके बदले जूट, कपड़े का बना बेहतर थैला यूज करें।

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पॉलीथिनमुक्त होने से ये समस्या होगी दूर

अगर जिला पॉलीथिनमुक्त हुआ तो पॉलीथिन नालियां व सीवरेज में फंसे होने के कारण ओवरफ्लो संबंधित जो समस्या आती है। वह नहीं होगी। वही पॉलीथिन जलने के कारण प्रदूषण ज्यादा फैलता है। वह भी नहीं होगा। वही तीसरे आवारा पशु जो कूड़े में मुंह मारते हुए पॉलीथिन खा जाते है जिससे आवारा पशुओं की मौत हो जाती है तो इससे यह भी समस्या दूर हो जाएगी।

सरकार के पॉलीथिन मुक्त करने के आदेश मिले

सरकार की तरफ से पत्र मिला है जिसमें 5 जून तक पॉलीथिनमुक्त करने के आदेश है, लेकिन सफाई कर्मचारी हड़ताल पर है इस कारण कोई भी काम नहीं हो रहा है। शौचालय की सफाई भी नहीं हो पा रही है। कर्मचारी कोई काम भी नहीं करने दे रहे हैं। एेसे में परेशानी का सामना करना पड़ा है।\\\'\\\' कुमार सौरभ, इंचार्ज, स्वच्छ भारत मिशन।

शौचालय साफ न हों तो उसको गूगल रिजेक्ट कर देगा

सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर होने के चलते शौचालयों की हालत भी खराब हुई पड़ी है। वही दूसरी तरफ आदेश है कि शौचालय को गूगल पर अपलोड किया जाएं, लेकिन वह साफ सुथरे होने चाहिए। अगर साफ सुथरे नहीं हुए तो गूगल उस शौचालय को रिजेक्ट कर देगा। इसको देखते हुए शहर के 4 ही शौचालय अपलोड किए गए है बाकी शौचालय साफ सुथरे नहीं है क्योंकि शौचालय की सफाई करने वाले कर्मचारी हड़ताल पर बैठे है।

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