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पढ़ो पंजाब-पढ़ाओ पंजाब प्रोजेक्ट के तहत जांच करने पहुंची टीम को बनाया बंधक

3 वर्ष पहले
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पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब प्रोजेक्ट का बायकॉट करने वाले अध्यापकों पर शिक्षा विभाग सचिव कृष्ण कुमार के नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देशों के बाद बुधवार को जिले में शिक्षा सुधार कमेटी की करीब 20 टीमों ने 615 स्कूलों में से करीब 100 स्कूलों में चल रहे प्रोजेक्ट की जांच की। जांच के दौरान गांव वजीदपुर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में डीपीआई इंद्रजीत सिंह को स्कूल मुखिया के कहने पर 4-5 की संख्या में अज्ञात ग्रामीणों, स्कूल अध्यापिकाओं व स्कूली बच्चों ने करीब आधा घंटा तक बंधक बनाए रखा। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों की सहायता से डीपीआई की गाड़ी स्कूल से बाहर निकली।

बीते कई दिनों से जिले में अध्यापक इस प्रोजेक्ट का बायकॉट कर रहे हैं। बुधवार को शिक्षा विभाग अधिकारियों के नेतृत्व में जिले में करीब 20 टीमें 615 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में जांच के लिए पहुंची। टीमें डायरेक्टर पब्लिक इंस्ट्रक्शन एलिमेंट्री इंद्रजीत सिंह व अस्सिटेंट स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब दविंद्र बोहा के नेतृत्व में जांच करने पहुंची थी। जांच के दौरान टीमों को स्कूल अध्यापकों की ओर से विजिटर रजिस्टर में विजिट नहीं डालने दी गई व टीमें ज्यादातर स्कूलों से बैरंग लौटीं।

दोपहर करीब 12 बजकर 05 मिनट पर डीपीआई इंद्रजीत सिंह ने गांव वजीदपुर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में विजिट किया। उन्होंने हाजिरी रजिस्टर चेक किया तोें आनंदप्रीत कौर का हाजिरी बॉक्स खाली छोड़ा गया था। उन्होंने स्कूल मुखिया दलजीत कौर से पूछा तो उन्होंने एक अर्जी दिखाई जिसमें 1 दिन की छुट्टी मांगी गई थी जोकि पूरी हो चुकी थी लेकिन अर्जी में कटिंग कर एक छुट्टी को 2 में तब्दील किया गया था तो अधिकारी ने पूछा कि अगर 2 छुट्टियों की अर्जी दी गई है तो रजिस्टर में छुट्टी क्यों नहीं लगाई गई। अधिकारी ने विजिटर रजिस्टर पर अपनी विजिट डाली कि ऐसा करने पर क्यों न स्कूल मुखिया पर कार्रवाई की जाए। डीपीआई विजिट के बाद जैसे ही गाड़ी में बैठकर जाने लगे तो स्कूल मुखिया ने फोन कर ग्रामीणों को बुलाया व बच्चों को गाड़ी के आगे बैठकर गाड़ी को रुकवा दिया।

इस दौरान करीब आधा घंटा तक डीपीआई को स्कूल मुखिया के कहने पर अध्यापकों, ग्रामीणों व स्कूली बच्चों ने बंधक बनाए रखा जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गाड़ी को निकाला। प्रोजेक्ट अस्सिटेंट डायरेक्टर दविंद्र बोहा ने सरकारी प्राइमरी स्कूल फिरोजशाह व सरकारी प्राइमरी स्कूल ख्वाजा खड़ग में विजिट की मगर वहां उन्हें रजिस्टर में विजिट नहीं डालने दी गई। इसके अलावा अन्य टीमों को भी ज्यादातर स्कूलों में विजिट नहीं डालने दी गई। डीपीआई को बंधक बनाने के सूचना जैसे ही टीमों को मिली व तुरंत यह सूचना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तो टीमें अपने-अपने जिलों में लौट गईं। वजीदपुर स्कूल में जांच के बाद डीपीआई उपायुक्त कार्यालय पहुंचे व मामले के बारे में जानकारी दी। उपायुक्त ने मामले को देखने के लिए एसडीएम हरजीत सिंह की ड्यूटी लगाई। एसडीएम हरजीत सिंह ने बताया कि डीपीआई की ओर से उनको अध्यापकों पर कार्रवाई के लिए कुछ भी लिखित में नहीं दिया गया।

डीपीआई इंद्रप्रीत सिंह की गाड़ी को रोकते ग्रामीण, अध्यापिकाएं व स्कूली बच्चे।

दहशत का माहौल पैदा किया जा रहा

ईटीयू अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह ने कहा कि अचानक जिले में शिक्षा विभाग अधिकारियों की ओर से टीमों को भेजकर दहशत का माहौल पैदा किया जा रहा है। महिला अध्यापकों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया व उन्हें सस्पेंड करने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से है व इसके लिए संघर्ष ओर तीखा करेंगे। वहीं डीपीआई को मिलने के बाद सुखविंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने डीपीआई इंद्रप्रीत सिंह को 27 अप्रैल को सीएम से होने वाली मीटिंग में मांगें रखनी की बात कही जिसे उन्होंने मान लिया है। जिसके बाद धरना खत्म किया गया।

हेडटीचर के कहने पर बनाया बंधक

डीपीआई इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि यह रूटीन जांच थी। उनके साथ अस्सिटेंट डायरेक्टर गुरजोत सिंह, बायो लेक्चरर जगराओं रमनधीर व एक कार्यालय स्टाफ शामिल थे। कुछ ग्रामीणों ने उनके साथ धक्कामुक्की की व बाद में ग्रामीण, अध्यापिकाएं व स्कूली बच्चों ने उनका रास्ता रोका। पुलिस ने उनकी गाड़ी को स्कूल से निकालने में सहायता की। अध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया तो उन्होंने ने बदतमीजी से बात की व सेक्रेट्री से मीटिंग करवाने की मांग की गई जिसके लिए उनकी ओर से मिलवाने का आश्वासन दिया गया। इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि मुट्ठीभर लोग भड़काए गए हैं।

अध्यापकों ने डीसी कार्यालय का गेट बंद कर दिया धरना

जांच के बाद करीब 300 अध्यापकों ने डीपीआई पर महिला अध्यापकों से अभद्र भाषा व अध्यापकों को सस्पेंड करने की धमकियां देने जैसे आरोप लगाते हुए उपायुक्त कार्यालय का गेट बंद कर धरना लगा दिया। इस दौरान अध्यापकों ने उपायुक्त कार्यालय में आने-जाने वाले किसी को परेशान नहीं किया। उनका कहना था कि वे केवल डीपीआई की गाड़ी को रोकेंगे। धरना करीब 1 घंटे तक चला।

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