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सरकारी जमीन हड़पने के लिए किसानों में लगी होड़, एसडीएम कोर्ट में सुनवाई आज

3 वर्ष पहले
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पिछले लंबे अरसे से फिरोजपुर जिला जमीनी विवादों को लेकर चर्चाओं में हैं। जमीन को हड़पने के लिए लोगों में होड़ सी लगी हुई है। कहीं मंदिर की जमीन को लेकर विवाद हो रहा है तो कहीं पर सरकारी जमीन पर ही कब्जे के प्रयास हो रहे हैं। जिले में इस वक्त करीब 7 सौ एकड़ जमीन पर धारा 145 लगी हुई है।

फिरोजपुर तहसील के रिकॉर्ड के मुताबिक गांव हरीहर झोक में सैकडों एकड़ भूमि मंदिर के नाम है। फरीदकोट के महाराजा ने किसी जमाने में यह भूमि लो लंगर को दान दी थी। बाद में मैनेजर (वायतमाल) ने 225 एकड़ कई लोगों के नाम करवा दी, जबकि नियम अनुसार इस प्रकार की भूमि किसी को बेची नहीं जा सकती। इस मामले को लेकर संबंधित किसानों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वर्ष 1978 में किसान केस हार गए जिसके बाद वे हाईकोर्ट में पहुंचे। हाईकोर्ट से केस हारने के बाद किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को दे दिया। मंदिर की 225 जमीन को हथियाने के लिए 112 किसानों द्वारा जद्दोजहद की जा रही है। अब 25 एकड़ भूमि की गिरदावरी अन्य व्यक्तियों के नाम होने पर विवाद हो गया। इस पर धारा 145 भी लगाई हुई है। इस मामले में आज सुनवाई होनी है।

मंदिर की ओर से किसान लड़ रहे हैं केस

मंदिर की जमीन कोई दूसरा न हथिया ले इसलिए गांव के अनेक लोग मंदिर की ओर से कोर्ट में केस की पैरवी कर रहे हैं जबकि बाद में गिरदावरी अपने नाम करवा कर कब्जा करने की मंशा से पार्टी बने लोग इस मामले में विरोधी पार्टी के रूप में हैं। गांव के गुरजीत सिंह ने बताया कि इस जमीन पर कई परिवारों के लोग पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं पर धीरे-धीरे लोग जमीन की गिरदावरी अपने नाम करवाते रहे और इसलिए हमने कोर्ट में केस किया है कि जमीन मंदिर के नाम ही रहनी चाहिए। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी मंदिर को पार्टी बनाकर हम पैरवी कर रहे हैं। हाल ही में 25 एकड़ की गिरदावरी गुरजीत सिंह, बलवीर सिंह, मलकीत सिंह, दरबारा सिंह, अमरजीत कौर के नाम से रणजीत, बलकार व हरजिंद्र के नाम कर दी गई है। इस गिरदावरी को रद्द करवाने के लिए हम 5 माह से धरने पर बैठे हैं। इसी प्रकार पूर्व में भी राजनीतिक असरदार लोग गिरदावरी करवाते रहे जिसका विरोध हम करते रहे। उन्होंने बताया कि मंदिर कार्यकारी महंत इंद्रजीत सिंह की मौत हो जाने के बाद उनके पोते को यह पद दिया गया है। मामले में शामिल गुरजीत सिंह ने बताया कि हम चाहते हैं कि मंदिर की सारी जमीन की देखभाल मंदिर के कार्यकारी महंत के अनुसार ही होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की ओर से पैरवी करने का जिम्मा कुछ ग्रामीणों की ओर से वकील को सौंपा गया है। इसमें झोक हरीहर, नूरपुर, अमृतसरी बस्ती, मोहरे वाला आदि कई गांवों के करनैल सिंह, जरनैल सिंह, श्रवण सिंह, नत्था सिंह आदि सैकड़ों लोग शामिल हैं जो जमीन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

गांव में भी मंदिर की जमीन

मंदिर की केवल कृषि योग्य भूमि पर ही लोग काश्त नहीं कर रहे बल्कि गांव में जो मंदिर की जमीन थी उस पर लोगों ने अपने मकान भी बनाए हुए हैं। मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो गांव की काफी जमीन मंदिर के नाम है जिसे लोगों ने कब्जा रखा है। मंदिर में मौजूद बलवीर सिंह, श्रवण सिंह, दरबारा सिंह, वावा सिंह, हरजीत सिंह आदि ने कहा कि मंदिर की जमीन मंदिर के नाम ही रहे। हम इस पर केवल काश्त करने की इजाजत मांग रहे हैं।

कभी थी हजारों एकड़ जमीन अब मात्र 206 एकड़ शेष रह गई

दरअसल अंग्रेजों के समय में वावा हरिहर ने इस गांव को बसाया था। उस वक्त हजारों एकड़ जमीन उनके पास थी। उन्होंने गांव में मंदिर बनवाया। वे गायों को भी पालते थे। जब एक विशेष समुदाय के लोगों ने गायों को मारने का सिलसिला शुरू कर दिया तो वावा हरिहर ने गांव लखोके, धलोके व कुलेवाला आदि से किसानों को गांव हरिहर में बसने का आग्रह किया और उनके गुजारे के लिए कुछ जमीन भी दी। उसके बाद लोगों ने अटूट लंगर में बढ़-चढ़कर सेवा करनी भी शुरू कर दी। लोगों द्वारा बुजुर्गों से सुनी बातों के अनुसार एक बार अंग्रेजों ने वावा हरिहर के लंगर की जांच करने के लिए रात को लंगर मांगा तो लंगर नहीं मिला। जिसके बाद अंग्रेजी अधिकारियों ने 24 घंटे की बजाय लंगर को 12 घंटे मानते हुए कुल रकबे की आधी जमीन काश्तकारों को दे दी। उसके बाद भी हजारों एकड़ जमीन वावा हरिहर के पास रह गई। जमीन मंदिर के नाम थी। आजादी के बाद लोगों ने अपने काश्त के आधार पर या फिर राजनीतिक प्रभाव के चलते जमीन को अपने नाम करवाना शुरू कर दिया।

गांव हरीहर की वो विवादित जमीन जिस पर धारा 145 लगी हुई है

ममदोट में वन विभाग की जमीन किसानों के नाम की

ममदोट में वन विभाग की 1083 एकड़ जमीन है। पटवारी विजय कुमार ने इस जमीन में से किसानों के नाम गिरदावरी करनी शुरू कर दी। करीब डेढ़ सौ एकड़ भूमि की गिरदावरी होने के बाद प्रशासन को भनक लगी। पटवारी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।

दोना तेलूमल में सरकारी भूमि करवा ली अपने नाम

दोना तेलूमल में करीब 700 एकड़ भूमि का मामला विवादों में घिरा हुआ है। तारों पार पाकिस्तान सीमा से सटी इस जमीन की गिरदावरी लोगों ने अपने नाम करवा ली। इसके बाद धारा 145 लगा दी है।

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