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नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे स्कूल वाहन

3 वर्ष पहले
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर निजी स्कूलों के वाहन बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन सबके बावजूद जिला प्रशासन व पुलिस अनजान बनी हुई है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल जिला बाल सुरक्षा विभाग ने 84 स्कूली वाहनों के चालान काटे तथा 9 वाहनों को थाने में बंद किया फिर भी स्कूल वाहनों को चलाने वाले बस ड्राइवर न तो वर्दी में है और न ही किसी वाहन में स्पीड गवर्नर ठीक से काम कर रहा है। इतना ही नहीं इन में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं हैं। पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते निजी स्कूल अपनी मनमानी कर मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

मनमानी

एक साल में जिला बाल सुरक्षा विभाग ने काटे 84 स्कूली वाहनों के चालान

नियमों को ताक पर रखकर स्कूली वाहन कोर्ट के नियमों की उड़ा रहे धज्जियां।

विभाग के पास स्टाफ की कमी

जिला बाल सुरक्षा अधिकारी जसविंदर कौर ने बताया पिछले वर्ष उनकी तरफ से 84 स्कूल वाहनों के चालान काटे गए तथा 9 वाहन बंद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास अभी स्टाफ व वाहनों की कमी है जिसके लिए उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिखा हुआ है जिस दिन उनकी यह कमी दूर हो गई तो वह उससे भी ज्यादा सख्ती करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश

स्कूल बस पीले रंग में पेंट होनी चाहिए। बस पर आगे पीछे स्कूल बस लिखा होना अनिवार्य है। किराये की बस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना अनिवार्य है। बस में फर्स्ट एड बाक्स के साथ आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए फायर निकास होना चाहिए। स्कूल का नाम व नंबर बस के पीछे लिखा होना चाहिए। स्कूल वाहन चालक को 5 साल का न्यूनतम अनुभव होना चाहिए। साथ ही एक सहायक होना आवश्यक है। इसके अलावा स्कूल बसों में अब सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य है। इन सभी के अलावा कई अन्य दिशा निर्देश और भी हैं।

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