अगर आप वेपन रखने के शौकीन हैं तो नशे से तौबा करनी होगी। जिले में लाइसेंसधारियों का डोप टेस्ट शुरू हो गया है। जैसे ही कोई लाइसेंसधारी अपने लाइसेंस को रिन्यू करवाने के लिए आवेदन करता है तो उसे पहले डोप टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और टेस्ट की रिपोर्ट ओके आने पर ही लाइसेंस रिन्यू किया जाता है। इसी प्रकार नए लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। डोप टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर लाइसेंस नहीं बनाया जाता। यह प्रक्रिया इसी बजट से आरंभ की गई है। अब तक आई रिपोर्ट के मुताबिक करीब 20 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। अब इन लोगों के लाइसेंस को लेकर आगामी कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन ने सरकार को पत्र लिखा है। क्राइम में कमी लाने के लिए सरकार ने लाइसेंस नशेड़ी व्यक्ति को न देने का फैसला किया था और नए आवेदकों के लिए डोप टेस्ट से गुजरना जरूरी कर दिया है। जिले में 20,340 वेपन लाइसेंस ऑनलाइन हो चुके हैं।
सख्ती
वेपन लाइसेंस बनवाने वाले 20 प्रतिशत का आ रहा है डोप टेस्ट पॉजिटिव
21 जून तक टेस्ट के लिए बुकिंग चल रही
सरकार के निर्देशानुसार 12 अप्रैल से सिविल अस्पताल में डोप टेस्ट शुरू हुए। हर दिन 30 से 40 टेस्ट हो रहे हैं। फिलहाल 21 जून तक टेस्ट के लिए बुकिंग चल रही है। डोप टेस्ट के बाद मेडिकल टीम रिपोर्ट प्रशासन को सौंपती है। अब तक एक हजार से अधिक टेस्ट हो चुके हैं और उनमें से जितने भी पॉजिटिव आए हैं उनके लाइसेंस पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। जो लाइसेंस होल्डर नशेड़ी पाया गया उसका लाइसेंस कैंसिल होना तय है। इसी प्रकार नए आवेदकों में भी उन्हीं के ही लाइसेंस बन सकेंगे जो नशों से दूरी बनाए हुए हैं।
सरकार के निर्देशानुसार होगी कार्रवाई
एडीसी डॉ. रिचा ने कहा कि जो रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही हैं उन पर क्या कार्रवाई करनी है इसके लिए सरकार को लिखा गया है। जो निर्देश आएंगे उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ केस ऐसे भी सामने आ रहे हैं जो नशेड़ी नहीं है लेकिन किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं इसी कारण उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ रही है। ऐसे लोगों के लिए भी कोई रास्ता निकालने के लिए सरकार से लिखा गया है।