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पाप का क्षय करता है अधिक मास

3 वर्ष पहले
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पाप का क्षय करता है अधिक मास

गैरतगंज| धार्मिक शास्त्र और पुराणों के अनुसार हर तीसरे साल अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है। इस मास में भगवान विष्णु का पूजन, जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। खास तौर पर भगवान कृष्ण, भगवद्गीता, श्रीराम की आराधना, कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह भर में उपासना करने का अपना अलग ही महत्व माना गया है। पुराण कहते हैं कि पुरुषोत्तम मास में कथा पढ़ने, सुनने से बहुत लाभ प्राप्त होता है। इस माह में जमीन पर शयन करना, एक ही समय भोजन ग्रहण करने से मनुष्य को अनंत फल प्राप्त होते हैं। सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. शिवशंकर शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार सभी नक्षत्र,तिथियां-वार, योग-करण के अलावा सभी माह के कोई न कोई देवता स्वामी है, किंतु पुरुषोत्तम मास का कोई स्वामी न होने के कारण सभी मंगल कार्य, शुभ और पितृ कार्य इस माह में वर्जित माने जाते हैं।अधिक मास उपवास, दान धर्म, पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।

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