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प्रशासन ने नहीं बताए खरीदी के मापदंड, 3 दिन में सिर्फ 58 क्विं. की खरीदी हुई
शासन द्वारा चना मसूर की उपज को समर्थन मूल्य खरीदी में शामिल करने के बाद किसानों को लाभ मिलने की बजाय उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। खरीदी केंद्रों पर आलम यह है कि किसानों को मापदंड बताए बिना क्वालिटी के नाम पर उपज को रिजेक्ट कर बेरंग लौटाया जा रहा है।
उधर प्रशासन ने खरीदी के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं भी नहीं की हैं। जिसके कारण किसान परेशान हो रहे हैं। जिसके चलते कृषि उपज मंडी में बनाए गए दो खरीदी केंद्रों पर 3 दिन में महज 58 क्विंटल की ही खरीदी हो पाई है। शनिवार को इन अव्यवस्थाओं के चलते किसानों ने भारी हंगामा किया तथा मौके पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने किसी तरह मामला शांत कराया था।
समर्थन मूल्य पर चना, मसूर एवं सरसों की खरीदी का कार्य 12 अप्रेल से शुरू किया गया है। इस खरीदी के पूर्व प्रशासन द्वारा किए जा रहे पूर्व तैयारी के दावे खोखले साबित हुए। कृषि उपज मंडी में बनाए गए दो खरीदी केंद्रों पर किसान को अपनी उपज बेचने के लिए भारी मशक्कत करना पड़ रही है। किसानों को यहां क्वालिटी खराब होने का कहकर बिना खरीद के ही लौटाया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि तीन दिन गुजर जाने के बाद भी दो केंद्रों पर महज 58 क्विंटल चना मसूर की ही खरीदी हो पाई है। शनिवार को किसानों ने इसको लेकर मंडी परिसर में जमकर हंगामा किया।
अपनी उपज बेचने मंडी में आए किसान नारायण सिंह सईदपुर, गोविंद सिंह सीहोरा एवं बृजलाल कुर्मी गैरतगंज ने बताया कि चना एवं मसूर की उपज एसएमएस की सूचना मिलने के बाद बेचने आए थे। परन्तु उनकी उपज खराब बताकर उनकी खरीदी नहींं की गई। ऐसा दर्जनों किसानों के साथ हुआ। किसानों का आरोप था कि उनसे उपज की सफाई करके लाने को कहा जा रहा है। जबकि पहले ऐसे कोई मापदंड नही बताए गए। हंगामा बढ़ने की सूचना पर एसडीएम एमपी बरार, मंडल अध्यक्ष मूरत सिंह ठाकुर, मंडी संचालक हरिकृष्ण गौर, अशोक सिंह ठाकुर, जसवंत सिंह मौके पर पहुंचे तथा किसानों से बात की। किसानों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम एमपी बरार ने मौके पर मौजूद मंडी सचिव सतीष मोहन पाराशर एवं क्वालिटी का मूल्यांकन करने वाले सर्वेयर सतेन्द्र साहू को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों पर उपज को साफ करने की व्यवस्था विभागीय स्तर पर तत्काल कराई जाकर किसानों से खरीदी का कार्य किया जाए। किसी भी स्थिति में किसान को अपनी उपज लेकर वापिस न लौटना पड़े। तब जाकर किसान शांत हुए।
केंद्रों पर किसानों को लाभ मिलने की बजाय उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं
किसानों को उपज की क्वालिटी खराब होने का कहकर केंद्रों से लौटाया जा रहा है
खरीदी केंद्रों पर खरीदी से संबंधित स्पष्ट निर्देश न होने के कारण किसान परेशान हैं।
पूर्व तैयारियों की खुली पोल किसान फिर परेशान
समर्थन मूल्य पर खरीदी के इस कार्य में प्रशासन द्वारा पूर्व तैयारी ठीक ढंग से न किए जाने के कारण किसानों के हंगामे की यह स्थिति बनी। जबकि पहले से प्रशासन को तय किए गए उपज के खरीदी मापदंडों की सूचना किसानों को देना थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा खरीदी केंद्र पर उपज की सफाई करने के लिए छन्नों का इंतजाम तक प्रशासन ने नहीं किया। वहीं निर्देशों के अनुसार किसानों की सुविधा के लिए बनाए जाने वाले समाधान केंद्र की स्थापना भी नहीं की गई। तथा जिन अधिकारियों की समाधान केंद्र पर डयूटी लगाई गई थी वे भी वहां नहीं पहुंचे। जिसके चलते किसानों को फायदा पहुंचाने वाली इस योजना में किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। तथा हंगामे के हालात बन रहे है। इस संबंध में बात किए जाने पर एसडीएम एमपी बरार का कहना है कि व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है।