गन्नौर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक है। इस कारण आए दिन शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं बंदरों के काटे मरीज भी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। हैरत की बात यह है कि प्रदेश में बेस्ट अवॉर्ड का दर्जा हासिल करने वाली सीएचसी में पिछले करीब डेढ़ माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन ही नहीं है। अस्पताल में सिर्फ टेटनेस के इंजेक्शन लगाकर उन्हें खानपुर मेडिकल कॉलेज या फिर सोनीपत सिविल अस्पताल भेज दिया जा रहा है।
गर्मी के मौसम में कुत्तों एवं बंदरों का आतंक बढ़ गया है। कुत्तों व बंदरों के काटने से परेशान मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए गन्नौर के सीएचसी में पहुंच रहे है। उन्हें बताया जा रहा है कि कुत्तों के काटने की एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दूर दराज के मरीजों को उपमंडल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चक्कर लगाना भी बेकार साबित हो रहा है। सीएचसी में मिले आंकड़ों के मुताबिक क्षेत्र में आवारा कुत्तों व बंदरों को आतंक बढ़ा है। वर्ष 2016 में सीएचसी में 205 लोग, वर्ष 2017 में 260 व वर्ष 2018 में मार्च माह तक 34 लोगों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगे है। मार्च माह से अस्पताल में इंजेक्शन न होने के चलते मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
प्राइवेट अस्पताल में लगवाया इंजेक्शन: मरीज : तेवड़ी गांव निवासी कृष्णा ने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया था। वह इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल में पहुंची। पांच रुपए देकर रसीद भी बनवा ली थी। लेकिन जब एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए गई तो उसे इंजेक्शन खत्म होने की बात कहकर खानपुर मेडिकल कॉलेज का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने बताया कि वह किराया लगाने के साथ टाइम वेस्ट से बचने के लिए खानपुर की बजाय शहर के प्राइवेट अस्पताल में इंजेक्शन लगवा लिया।