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अस्पताल में पुलिस चौकी की जरूरत

3 वर्ष पहले
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गंगापुर सिटी | सामान्य चिकित्सालय में इन दिनों समाज कंटकों की कारगुजारी बढ़ गई है। कभी जेब से पैसे निकालने तो कभी मोबाइल चोरी आदि घटनाएं सामने आ रही हैं। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था के बाद भी समाजकंटक वारदात को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि कैमरों की नजर मुख्य भवन तक ही सीमित है। अस्पताल में सुरक्षा के मद्देनजर दो होगार्ड तैनात हैं लेकिन व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही। ऐसे में समाजकंटकों की कारगुजारी पर लगाम लगाने के लिए अस्पताल में पुलिस चौकी की दरकार है।

पर्चा बयान में होती है देरी

अस्पताल में स्थानीय उपखंड के अलावा वजीरपुर, बामनवास, नादौती व सपोटरा क्षेत्र के रोगी भी उपचार के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन करीब 12 से 14 सौ रोगियों का औसत रहता है। दुर्घटना व मारपीट में घायलों को भी उपचार के लिए भर्ती किया जाता है। पुलिस चौकी के अभाव में घायलों के पर्चा बयान तत्काल दर्ज नहीं हो पाते हैं। अस्पताल की ओर से सम्बन्धित थाने को घायल के भर्ती होने की सूचना कार्मिक को थाने भेज कर दी जाती है। कई बार तो पुलिसकर्मी के पहुंचने से पहले ही घायल को रेफर कर दिए जाने से बयान दर्ज नहीं हो पाते हैं। कई बार मृत घोषित किए जाने पर लोग बिना कार्रवाई शव ले जाते हैं।

अस्पताल में पुलिस चौकी के लिए कई पत्र भेजे गए हैं लेकिन अभी तक पुलिस की व्यवस्था नहीं हुई। एसपी की ओर से भी प्रस्ताव भेजा गया है। -डॉ. जी.बी. सिंह, पीएमओ

गंगापुर सिटी | सामान्य चिकित्सालय में इन दिनों समाज कंटकों की कारगुजारी बढ़ गई है। कभी जेब से पैसे निकालने तो कभी मोबाइल चोरी आदि घटनाएं सामने आ रही हैं। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था के बाद भी समाजकंटक वारदात को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि कैमरों की नजर मुख्य भवन तक ही सीमित है। अस्पताल में सुरक्षा के मद्देनजर दो होगार्ड तैनात हैं लेकिन व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही। ऐसे में समाजकंटकों की कारगुजारी पर लगाम लगाने के लिए अस्पताल में पुलिस चौकी की दरकार है।

पर्चा बयान में होती है देरी

अस्पताल में स्थानीय उपखंड के अलावा वजीरपुर, बामनवास, नादौती व सपोटरा क्षेत्र के रोगी भी उपचार के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन करीब 12 से 14 सौ रोगियों का औसत रहता है। दुर्घटना व मारपीट में घायलों को भी उपचार के लिए भर्ती किया जाता है। पुलिस चौकी के अभाव में घायलों के पर्चा बयान तत्काल दर्ज नहीं हो पाते हैं। अस्पताल की ओर से सम्बन्धित थाने को घायल के भर्ती होने की सूचना कार्मिक को थाने भेज कर दी जाती है। कई बार तो पुलिसकर्मी के पहुंचने से पहले ही घायल को रेफर कर दिए जाने से बयान दर्ज नहीं हो पाते हैं। कई बार मृत घोषित किए जाने पर लोग बिना कार्रवाई शव ले जाते हैं।

अस्पताल में पुलिस चौकी के लिए कई पत्र भेजे गए हैं लेकिन अभी तक पुलिस की व्यवस्था नहीं हुई। एसपी की ओर से भी प्रस्ताव भेजा गया है। -डॉ. जी.बी. सिंह, पीएमओ

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