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पानी के कैन ने बिगाड़ा देशी फ्रिज का क्रेज

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | गंगापुर सिटी

बदलते परिवेश का असर इन दिनों देशी फ्रीज (मटकों) की दुकानों पर पड़ रहा है, बीते सालों से इनकी बिक्री में कमी आती जा रही है।

कारोबारियों के कहना है कि वर्तमान में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों में भी चिल्ड पानी की केनों का क्रेज बढ़ गया है। अधिकतर दुकानदार इसका उपयोग कर रहे हैं। इसके चलते देशी फ्रीज का चलन कम होने लगा है।

बुजुर्गों का कहना है कि पहले विद्युत उपकरणों से चलने वाले फ्रिज नहीं थे। उस समय लोग मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग करते थे लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कम होने लगा। घरों में अब फ्रिज का उपयोग होने लगा है। ग्रामीण अंचल में मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग हो रहा है।

हालांकि फ्रिज के पानी से प्यास ठीक से नहीं बुझ पाती है। वहीं मिट्टी के बर्तनों का पानी प्यास बुझाता है इसलिए लोग मिट्टी के मटके मटकी और नांदों का ही उपयोग करते हैं। मिट्टी के बर्तनों में पीने का पानी शुद्ध और ठंडा रहता है। इस पानी से सर्दी, जुकाम, खांसी जैसी बीमारियां नहीं होती है।

कसाई पाड़ा व कुम्हार मोहल्ला में मिट्टी के बर्तनों का व्यवसाय करने वालों का कहना है कि वर्तमान में चिल्ड पानी की कैन व घर-घर में फ्रीज होने से कारोबार पर असर पड़ा है। इस वर्ष छोटी मटकी 25 रुपए प्रतिनग, बड़ा मटका 150 रुपए, बड़ी नांद 300 रुपए में बिक रही है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही मिट्टी के बर्तनों को बाहर से खरीदने का दौर शुरू हो जाता है। मार्च-अप्रैल महीने में मिट्टी के मटके जयपुर सहित आस-पास से मंगवाए जाते हैं।

गंगापुर सिटी. हालांकि मटकों की बिक्री बढ़ गई है, मगर पहले जैसी खरीदारी नहीं।

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