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रेलकर्मी देश में कहीं भी करा सकेंगे इलाज

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | गंगापुर सिटी

सुप्रीम कोर्ट ने 44 लाख वर्तमान और रिटायर्ड केन्द्रीय कर्मचारियों को देश के किसी भी निजी अस्पताल में मेडिकल सुविधा देने के आदेश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि बेहतर चिकित्सा कर्मचारी का अधिकार है, इसलिए केंद्र सरकार ऐसे किसी भी बिल का भुगतान करने से मना नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की पालना के लिए ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी को पत्र भेजकर आदेश की पालना की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अगर कर्मचारी ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया है जो पैनल में शामिल नहीं है तो सरकार को यह देखना जरुरी है कि क्या वाकई में संबंधित व्यक्ति ने इलाज कराया या नहीं। इलाज कराने पर बिल का भुगतान नहीं रुकना चाहिए। अभी तक केवल एक रेल मंडल में कुछ ही प्राइवेट अस्पताल अनुबंधित हैं। कई प्राइवेट अस्पताल में सुपर स्पेसिलिटी की सुविधा भी नहीं है। कई फैकल्टी विभाग के डॉक्टर तक प्राइवेट अस्पताल में नहीं है। ऐसे में रेलकर्मियों को दूरस्थ अस्पतालों में इलाज करवाने जाना पड़ता है।

पेंशनरों पर पहले लागू करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना सबसे पहले रिटायर्ड रेल कर्मचारी, अधिकारी व उनके परिवार के सदस्यों के लिए लागू किए जाने की आवश्यकता है। इस बात को रेलवे प्रबंधन ने भी स्वीकार किया है। इसके लिए कर्मचारियों के सीटीएसई कार्ड तैयार होंगे। सबसे पहले स्कीम रिटायर्ड रेल कर्मचारी, अधिकारी व उनके परिवार के सदस्यों के लिए सीटीएसई कार्ड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए उन सभी लोगों को अपने-अपने कार्यालय में जाकर आवेदन करना होगा।

कर्मचारियों को मिलेगा बेहतर इलाज

सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने पर 13 लाख रेलकर्मियों व उनके परिवार वालों को आवश्यकता पड़ने पर देश के किसी भी प्राइवेट अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। साथ ही इलाज के लिए अपने घर के पास के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाया जा सकेगा। नरेन्द्र जैन, मंडल उपाध्यक्ष, वेसेरे एम्पलाइज यूनियन, गंगापुर सिटी

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