इकबाल गुड्डी | गंगापुर सिटी
रमजान का मुबारक माह चल रहा है। हर मोमीन बंदा सारी व्यस्तता को दरकिनार करते हुए रोजा रखकर खुदा की इबादत में मशगूल है। कोई कुरान शरीफ पढ़कर तो कोई नमाज पढ़कर खुदा की इबादत में व्यस्त है। रमजान माह के चलते मस्जिदों में रौनक बनी हुई है। बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक इस पाक महीने की रस्मों को बड़ी शिद्दत से अदा कर रहे हैं।
कुरान के अनुसार रमज़ानुल मुबारक के महीने में रोजे रखकर सारे काम खास वक्त पर करने से इंसान एक सांचे में ढल जाता है। हर अमल नेक नियति से होता है। रोजेदार के हर अमल से अमन की फिजा निकलती है। रहमतों से भरे रमज़ानुल मुबारक माह की खास अहमियत होने से हर एक मुसलमान कोई भी नेक अमल कर नेकी कमाने से नहीं चूकता है। इस माह के प्रारंभ होने के साथ ही अलसुबह सहरी करने से लेकर दिन में पांच वक्त की नमाज और इबादत करने का दौर चल रहा है।
दिल से बांटते जकात व खैरात: इस मुबारक महीने में मोमीन अपनी आमदनी से कुछ हिस्सा खैरात के लिए निकालता है और जरूरतमंदों व बेवाओं की मदद करता है। वहीं इस महीने के आखिरी आने वाले ईद-उल-फितर की खुशियों में शरीक होता है। इस महीने में हर मुसलमान दिल से अपनी कमाई का अपने घर में रखे सोने-चांदी के गहनों की जकात निकालता है।
खुशियों की बहार लाती है ईद : रमजान महीने का आखिरी हिस्सा जैसे ही शुरू होता है तो मुस्लिम नए कपड़ों की खरीदारी के लिए बाजारों में निकलते हैं। अपने घरों की खास सजावट करते हैं। तरह तरह के सजीले व भड़कीले लिबास ईद की नमाज के लिए तैयार करवाते हैं। ईद-उल-फितर मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा त्योहार होता है। इस दिन के लिए उनकी ये सोच है कि इस दिन हर मोमीन बंदा अल्ला का मेहमान होता है। ईद का चांद जैसे नजर आता है तो लोग खुशी से एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। घर-घर खुशी नजर आती है। ईद के दिन सुबह सभी घरों में सिवैयां और कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं और तमाम रिश्तेदारों, दोस्तों को दावत देते हैं। वहीं ईद की नमाज सभी मिलकर ईदगाह पर अदा करते हैं।
नौनिहाल भी रखते रोजे : इन दिनों गर्मी की इस तपिश में नौनिहाल बड़े चाव से रोजे रख रहे हैं। छोटे बच्चे सुबह 2.30 बजे उठते ही खुशी-खुशी उमंग के साथ रोजा रखते हैं। सुबह 4 बजे सहरी के बाद शाम को सूर्यास्त पर रोजे खोलते हैं। इस दरम्यान बच्चे कुरान पढ़ते हैं। बड़ों के साथ नमाज भी अदा करते है। वहीं महिलाएं भी इस गर्मी में रोजेदार होते हुए भी घरों के सारे काम करती हैं वहीं इफ्तार के लिए अपने घर के इफ्तार के दस्तारखान को बेहतरीन बनाने के लिए तरह-तरह के व्यंजन, लजीज खाने, शरबत, नमकीन, फल आदि सजाती हैं।
खुदा से डरें, बुराइयों से बचें : रमजान के मौके पर जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना खलीक कासमी का कहना है कि यह माह जीवन को सुधारने के लिए है। उन्होंने बताया कि इंसान झूठ, फरेब, लालच, बेईमानी व दिखावे से बचें। खुदा का डर जेहन में बिठाकर रखें। जैसे आसपास कांटे हो और बीच में पगडंडी पर चलते हैं तो अपने कपड़ों को इस तरह से सिमेटकर चलें कि कोई कांटा उलझ न जाए। इसी तरह से जीवन की राह में भी खूब कांटे व प्रलोभन हैं, जो इंसान को भटका सकते हैं। रमजान का माह इन्हीं कांटों और प्रलोभनों से बचने का है।