तलावड़ा . नारायणपुर टटवाड़ा स्टेशन पर यात्रियों के लिए सुविधाओं का अभाव है। अधूरा प्लेटफार्म तथा ओवर ब्रिज के अभाव में सीधे पटरियां पार करते लोग।
भास्कर न्यूज | तलावड़ा
नारायणपुर टटवाड़ा रेलवे स्टेशन कोटा मंडल के सभी ग्रामीण क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों में से सर्वाधिक यात्री भार और राजस्व देने में अग्रणी स्टेशन है। उपतहसील तलावड़ा एवं सपोटरा तहसील क्षेत्र का यह रेलवे स्टेशन कोटा मंडल और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते आधुनिक यात्री सुविधाओं की फिलहाल बाट जोह रहा है।
कोटा डीआरएम ने 27 अगस्त 15 को रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर आधुनिक यात्री सुविधाएं बढ़ाने की बात कही थी परंतु तीन साल बाद भी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को कोई सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। रेलवे स्टेशन पर लंबे समय से चली आ रही जनशताब्दी एक्सप्रेस, मेवाड़ एक्सप्रेस और कोटा-कटरा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के ठहराव की मांग भी अभी पूरी नहीं हुई है। यहां इन ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को सफर करने के लिए गंगापुर सिटी या फिर सवाई माधोपुर जाकर बैठना पड़ता है, जिससे अनावश्यक समय एवं धन की बर्बादी होती है।
सुपरफास्ट ट्रेनों का हो ठहराव
उपतहसील तलावड़ा और सपोटरा तहसील क्षेत्र के यात्रियों ने केन्द्रीय रेल मंत्री, सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, विधायक मानसिंह गुर्जर और कोटा डीआरएम को कई बार पत्र लिखकर नारायणपुर टटवाड़ा स्टेशन पर सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव करने की मांग की। मगर हर बार नतीजा सिफर ही रहा है। यात्रियों ने बताया कि इस स्टेशन पर यदि कोटा-निजामुद्दीन जनशताब्दी एक्सप्रेस, निजामुद्दीन-उदयपुर मेवाड़ सुपरफास्ट एक्सप्रेस और कोटा-कटरा एक्सप्रेस का ठहराव होता है तो रेलवे का राजस्व बढ़ेगा साथ ही यात्रियों को भी इन ट्रेनों का फायदा मिलेगा।
कमाई में नंबर वन, सुविधाओं में सिफर
स्टेशन सूत्रों के अनुसार इस रेलवे स्टेशन की रोजाना की औसत आय करीब 30 हजार रुपए है। यह आय कोटा मण्डल के ग्रामीण स्टेशनों में सबसे अधिक है। आमदनी देने में नंबर वन होने के बावजूद भी इस स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। रेलवे स्टेशन पर सुविधायुक्त प्रतीक्षालय, फुट ओवर ब्रिज, रेलवे केंटीन, सुलभ शौचालय और पृथक आरक्षण खिड़की की कमी खलती है। रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म एक से दो पर जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज नहीं है। जिस कारण यात्रियों को जान जोखिम में रख कर पटरी पार करनी पड़ती है। जिससे कई बार उन्हें अकाल मौत का ग्रास बनना पड़ता है। स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर तो फर्श का काम भी अधूरा पड़ा हुआ है। जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल इन ट्रेनों का ठहराव
रेलवे स्टेशन पर आगरा-कोटा, आगरा-नीमच, मथुरा-रतलाम, मथुरा-सवाई माधोपुर, बयाना-जयपुर पैसेंजर, मुजफ्फरपुर-बान्द्रा जनता एक्सप्रेस, बान्द्रा-देहरादून और पटना-कोटा जैसी एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होता है।
इन गांवों के ग्रामीण करते हैं सफर
इस स्टेशन से तलावड़ा उपतहसील क्षेत्र के टटवाड़ा, बाढ़ कोटड़ी, हीरापुर, बाढ़ रामसर, तलावड़ा, नारायणपुर, कोटड़ी, फजीतपुरा, जयसिंहपुरा, टोटोलाई, मीनापाड़ा, कड़ी झोंपड़ी, कड़ी गांवड़ी, रामपुरा ढाणी, श्यामपुरा तथा सपोटरा तहसील क्षेत्र के बड़ौदा, रानेटा, सपोटरा, नारौलीडांग, जीरोता, चौड़ागांव, बूकणा, मसावता, खानपुर, जीवली, आदि गांवों के ग्रामीण सफर करते हैं।
7 घंटे बाद मिलती है अगली ट्रेन
यात्रियों ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की कमी का आलम यह है कि दिल्ली की तरफ जाने वाले यात्रियों को सुबह 10 बजे जयपुर-बयाना ट्रेन निकल जाने के बाद अगली ट्रेन शाम 5 बजे कोटा-पटना ही मिलती है, मगर कोटा-पटना ट्रेन का कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में यात्रियों को शाम को रतलाम-मथुरा लोकल सवारी गाड़ी ही नसीब होती है। अवध एक्सप्रेस का ठहराव हो जाता है तो यात्रियों को फायदा मिलेगा। साथ ही रेलवे को भी राजस्व मिलेगा।