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सरपंच ने मृत व्यक्ति के नाम उठाया मनरेगा का भुगतान, भाई की पत्नी ने उसी को मेट बना दिया

3 वर्ष पहले
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गंगापुर सिटी पंचायत समिति की हीरापुर ग्राम पंचायत में मनरेगा का घोटाला उजागर हुआ है। जांच में सरपंच दोषी पाए जाने के बाद भी जिला परिषद की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मामला यह है कि सरपंच मक्खनलाल मृत व्यक्ति नाहर सिंह के नाम की हाजिरी भरता रहा और पैसा उठाता रहा। सरपंच से हटने के बाद उसके छोटे भाई की प|ी ने भी इस घोटाले को आगे बढ़ाते हुए मृत नाहर सिंह को मेट बना दिया जो कागजों में जिंदा रहते हुए मनरेगा की निगरानी करता रहा। इस नाम से उठने वाला पैसा सरपंचों की जेब में जा रहा है। शिकायत पर जांच के बाद दोषी ठहराने के बाद भी दोनों ही सरपंचों के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से पैसा उठाने एवं गबन करने वाले लोगों की जांच के बाद दोषी पाए जाने के बावजूद दोषियों काे बचाया जा रहा है। उच्च अधिकारी गबन का पैसा सरपंचों एवं गबन करने वाले लोगों से वसूलने एवं कानूनी कार्रवाई करने के लिए एफआईआर दर्ज कराने के आदेश हो चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

गंगापुर सिटी की हीरापुर पंचायत का मामला

हीरापुर में बनी सड़क जिसके रिकॉर्ड में मृत के नाम से उठाई मनरेगा राशि

सरपंच के बाद छोटे भाई की प|ी सरपंच, घोटाला जारी रहा

मौत के बाद भी श्रमिक का नाम नहीं हटाया

हीरापुर ग्राम पंचायत के नहार सिंह की मृत्यु 4 अक्टूबर 2013 को हो चुकी थी। इसके बाद भी वो कागजों में मनरेगा का काम करता रहा और पैसा उठता रहा।

मृत श्रमिक को मेट बनाया, निगरानी करता रहा

मक्खनलाल का कार्यकाल पूरा हो गया। उसके छोटे भाई की प|ी हेमा मीना जनवरी 2015 में नई सरपंच बनी। हेमा ने मरे हुए नहार सिंह को श्रमिक की सूची से हटा कर मेट बना दिया।

ऐसे उठा पैसा :नहार सिंह द्वारा किए गए काम का भुगतान उसके एवं उसकी प|ी के ज्वॉइंट खाते में जमा होता रहा और वह पैसा खाते से सरपंच निकालते रहे।

मृतक की प|ी के संयुक्त खाते से सरपंच निकालते रहे राशि, पता भी नहीं चलने दिया, दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत

शिकायत : मृत नाहरसिंह का नाम अब भी रिकॉर्ड में

ग्रामीणों ने जिला परिषद एवं कलेक्टर को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2013 में गांव का सरपंच मक्खन लाल मीना था। उस समय उसके पास मनरेगा के तहत जारी मस्टररोल में काम करने वाले श्रमिकों में नहार सिंह मीना पुत्र बद्रीलाल मीना का नाम भी शामिल था। इसी दौरान 4 अक्टूबर 2013 को नहार सिंह की मृत्यु हो गई। लेकिन सरपंच एवं सचिव के पास मस्टेरोल के रिकार्ड में मरा हुआ नहार सिंह मीना बतोर श्रमिक काम करता रहा।

जांच रिपोर्ट : मृत व्यक्ति के नाम उठ रहा पैसा

प्रमाणों के आधार पर जिला परिषद की टीम ने मामले की जांच की और जांच में वर्तमान एवं पूर्व सरपंच पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। इस गांव में जांच में पाया गया कि सरपंच ने जो व्यक्ति मर चुका है उसे कागजों में मेट दिखाया और उस मरे हुए व्यक्ति की निगरानी में मनरेगा का काम होना बताया। घोटाले की पोल जब खुली जब मरे हुए आदमी द्वारा किए गए फर्जी काम का भुगतान उसके खाते में जमा करवा कर उसकी प|ी के नाम से पैसा भी निकाल लिया गया।

जांच कमेटी ने दी रिपोर्ट जांच कमेटी ने पूरे मामले की जांच के बाद अपनी जांच रिपोर्ट 13 दिसंबर 2017 को सीईओ को प्रस्तुत कर दी। जांच कमेटी ने घोटाले की बात अधिकारियों के सामने रख दी।

अफसर : शिकायत को दबाते गए अफसर

गांव के लोगों ने सबसे पहले 10 सितंबर 2017 को इसकी पहली शिकायत जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं कलेक्टर से की, शिकायत के साथ सभी दस्तावेज एवं प्रमाण भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन शिकायत को दबा दिया गया। लोगों ने कई बार याद दिलाया, लेकिन शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मंत्री के यहां से हुए आदेश तो हुई जांच

एक माह बाद ग्रामीणों ने प्रमाणों के साथ इसकी शिकायत पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड एवं अतिरिक्त आयुक्त द्वितिय इजीएस अली खान को भी की। जांच के आदेश आने पर जिला परिषद के सीईओं को जांच सौंपी। कमेटी में पंचायत प्रसार अधिकारी कैलाश बैरवा एवं भगवान सहाय बैरवा को नियुक्त किया गया।

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