गंजबासौदा| श्री गिरिराज पर्वत कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण का रूप है। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए गोर्वधन परिक्रमा व पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह बात छुल्हेंटा गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन पंडित तरुण महाराज ने कही। कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गोवर्धन पूजन करने का उपदेश बृजवासियों को दिया था। गोवर्धन पूजन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गोवर्धन पूजन यानी प्रकृति का पूजन। प्रकृति की आराधना करने से भगवान भी प्रसन्न होते हैं। मानव जीवन तभी तक सुरक्षित है जब तक प्रकृति सुरक्षित है। जिस दिन संसार से वृक्ष, नदी, व पर्वत नहीं रहेंगे जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा। हिन्दू धर्म में नदी, वृक्ष व पर्वत को भगवान का दर्जा दिया है, इनकी पूजन के साथ साथ इनकी देखरेख करना भी हमारी जिम्मेदारी है। इस मौके पर काफी श्रद्धालु मौजूद थे।