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जलसंकट : ढाबला माधोसिंह में दो किमी दूर से ला रहे पानी, बोलिया में 15 दिन में हो रहा सप्लाई

3 वर्ष पहले
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पेयजल वितरण व्यवस्था सुधरने की जगह बिगड़ती जा रही है। गांव से लेकर शहर तक यह हालात हैं। ऐसे में लोगों को निजी जलस्रोत के साथ टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। शामगढ़ में जहां पहले एक दिन छोड़कर पानी वितरण हो रहा था। अब नगर में किसी क्षेत्र में दो तो किसी क्षेत्र में तीन दिन छोड़कर मिल रहा है। गरोठ में पानी तो नियमित आ रहा है लेकिन कब और कितनी देर मिलेगा, निश्चित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा बुरे हैं। बोलिया में 10 से 12 दिन तो भानपुरा के ग्राम पंचायत ढाबला माधोसिंह में लोगाें का ट्यूबवेल का सहारा हैं। इन दोनों पंचायत में 20 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।

शामगढ़ में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन पानी दिया जा रहा था। नगर परिषद के तत्कालीन अधिकारी आश्वासन देते रहे कि पानी की किल्लत नहीं आने देंगे। हालात यह हो गए हैं कि अब नगर के 15 वार्डों में कहीं पर एक दिन छोड़कर तो कहीं दो व तीन छोड़कर पानी वितरण हो रहा है। सबसे ज्यादा बुरे हालात वार्ड 14 व 15 के हैं। साथ ही वार्ड 8 व 9 स्थित कॉलोनी क्षेत्र में पानी किल्लत है। वार्ड 8 स्थित कान्हा मांगलिक भवन रहवासी क्षेत्र, गोकुलधाम कॉलोनी, श्री गोकुलधाम, लक्ष्मण कॉलोनी में नगर परिषद ने मार्च से पानी देना शुरू किया था। अब यहां कहीं दो तो कहीं तीन छाेड़कर पानी सप्लाई हो रहा है। रहवासी प्रभुसिंह चौहान, विमल राठाैर, विनोद कुमावत, बबलू भावसार ने कहा कि अधिकारी है नहीं, कर्मचारी सुनते नहीं। निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। सीएमओ बनेसिंह सोलंकी का कहना है कि लगातार व्यवस्था सुधारने में लगे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा बुरे, दोनों पंचायतों में 20 हजार से ज्यादा लोग परेशान

ढाबला माधोसिंह में गांव के बाहर हैंपपंप से पानी भरकर ले जाते ग्रामीण।

पंचायत के 8 में से 5 हैंडपंप बंद

भानपुरा तहसील के ढाबला माधोसिंह बड़ी पंचायत होकर इसमें दो बड़े गांव के साथ 12 से ज्यादा मजरे-टोले जुड़े हैं। पंचायत की 6 हजार से ज्यादा आबादी हैं। गांव में पानी की टंकी है लेकिन कुआं सूख गया। वहीं 8 में से 5 हैंडपंपं। ढाबला माधोसिंह निवासी राजू बैरागी ने बताया अब निजी कुएं और तीन सरकारी हैंडपंप ही सहारा हैं। सरपंच प्रकाश बंजारा ने बताया पंचायत के ग्राम बग्गा का डेरा में दो ट्यूबवेल में पानी होने के कारण उसमें विगत दिवस मोटरें लगवाई हैं और जब तक ट्यूबवेल में पानी रहता है सप्लाई करते हैं। पानी खत्म होने के बाद इंतजार करते हैं। यदि 3 हजार फीट पाइप मिल जाए तो हम सरकारी कुएं तक पानी पहुंचाकर टंकी को भरकर उससे सप्लाई कर सकते हैं। इससे 10 मजरे के लोगों को भी कुछ लाभ मिल सकता हैं।

बोलिया में 15 से 20 मिनट ही मिल रहा पानी

बोलिया में 15 दिन पहले तक 7 से 8 दिनों में पानी मिल रहा था। 15 हजार की अाबादी वाली इस पंचायत में अब 10 से 12 दिनों में पानी पानी सप्लाई हो रहा है। वह भी 10 से 12 मिनट तो कहीं 15 से 20 मिनट मिल रहा है। लोगाें को टैंकरों से खरीदना पड़ रहा है। यहां भी सरपंच-सचिव ने हालात सुधारने के दावे किए थे। हुअा कुछ नहीं और हालात बिगड़ गए। मोहम्मद इरफान, अनिल कचोलिया ने बताया शिकायत किससे करें। कोई सुनने वाला नहीं। गरीब तो आज भी डेढ़ से दो किमी दूर से पानी ला रहा है।

व्यवस्था सुधारने के निर्देश दूंगा

नदी में पानी का जल स्तर कम होने से यह हालात बने हैं। अतिरिक्त मोटर लगाकर पानी की पूर्ति के निर्देश दिए हैं। तेज आंधी के कारण बीच में पानी वितरण की व्यवस्था गड़बड़ाई थी। अब धीरे-धीरे सुधर जाएगी। प्रेमशंकर पटेल, प्रभारी सीएमओ व तहसीलदार शामगढ़

शामगढ़ के वार्ड नंबर 15 स्थित आलमगढ़ में पानी की टंकी ओवरफ्लो हो गई।

स्टेशन रोड के लोग बोले- यदि सात दिन में व्यवस्था नहीं की तो 28 को लगाएंगे जाम

गरोठ | ग्राम पंचायत पावटी के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशन रोड रहवासी पेयजल के लिए परेशान हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी पंचायत द्वारा ध्यान नहीं देने से नाराज रहवासी शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां तहसीलदार अजय पाठक को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी दी कि सात दिन में पेयजल की व्यवस्था नहीं की तो हम 28 मई को बोलिया-गरोठ रोड रेलवे फाटक के पास सड़क जाम करेंगे।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि स्टेशन रोड स्थित रहवासी क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से पानी की किल्लत है। महिलाओं को 1 से 2 किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी ग्राम पंचायत द्वारा काेई व्यवस्था नहीं की गई और टैंकर भी नहीं चलाए गए। यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो रेलवे फाटक बोलिया-गरोठ रोड पर ग्रामीणों द्वारा आमरण अनशन कर चक्काजाम किया जाएगा। मुकेश गुर्जर, शहजाद, चंदाबाई, मानसिंह, नरेंद्र शर्मा, राकेश गुर्जर सहित ग्रामीण मौजूद थे।

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