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डीएवी जूनियर विंग के बच्चों को ट्रांसफर करने का विरोध

3 वर्ष पहले
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झारखंड पंद्रह नंबर की डीएवी जूनियर विंग स्कूल को डीएवी प्रबंधन ने मंगलवार को हमेशा के लिए बंद कर दिया। बंद स्कूल के बच्चों को पढाई के लिए स्कूल बस के माध्यम से केदला डीएवी ट्रांसफर किया गया। लेकिन डीएवी प्रबंधन के खिलाफ मंगलवार को अभिभावकों जमकर विरोध किया। छोटे छोटे बच्चों को केदला डीएवी भेजे जाने पर अभिभावकों ने स्कूल बस को रोक दिया।

अभिभावकों का समूह सीधे झारखंड कोलियरी के खान प्रबंधक रामेश्वर मुंडा के आवास पर पहुंचा। जहां पर दो घंटे तक आवास के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर घेराव किया गया। इस बीच जब खान प्रबंधक रामेश्वर मुंडा अभिभावकों से मिलकर बात करने की कोशिश कि तो अभिभावकों ने स्कूल को पहले की तरह बहाल करने की मांग करने लगे। प्रबंधक ने इस मामले को लेकर एक दिन का समय मांगते हुए जीएम से बात कर हल निकालने का आश्वासन दिया। तब जाकर अभिभावकों का दल वहां से वापस हुअा।

प्राचार्य एनपी यादव ने इस संबंध में कहा कि जूनियर विंग झारखंड पंद्रह नंबर में एलकेजी से टू क्लास तक बच्चे पढ़ते हैं। लोकल मैनेजिंग कमेटी ने भवन को असुरक्षित घोषित किया है। भवन की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। भवन कभी भी ढह सकता है। जिसकी वजह से बच्चों को केदला डीएपी में भेजा जा रहा है।अभिभावकों का नेतृत्व कर रहे प्रमोद महतो ने बताया कि हमारे बच्चे छोटे छोटे हैं। यहां पर केदला डीएवी की जूनियर विंग कई सालों से चलती आ रही है। हम लोगों ने घर के सामने स्कूल समझ कर बच्चों का नामांकन करवाया है। मगर अब जूनियर विंग को केदला में ट्रांसफर किया जा रहा है। जिसकी दूरी करीब पांच किलोमीटर है। ऐसे में हमारे बच्चों को इतनी दूर भेजना संभव नहीं है।मौके पर राजेश रजवार, मन्नू सिंह, प्रदीप सिंह, लालमण महतो, टुन्नु कुमार, गंदौरी रजवार, फिफटी महतो, विजय रजवार, हीरालाल महतो, विनोद केसरी, आकाश करमाली आदि शामिल थे।

खान प्रबंधक को स्कूल पुन: बहाल कराने की मांग करते अभिभावक।

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