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एक महीने से बच्चों को नहीं मिल रहा मिड डे मील

3 वर्ष पहले
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केंद्र की ओर से सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही मिड डे मील योजना दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। मांडू प्रखंड के लइयो तितर मरवा के नव प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील योजना में बदइंतजामी का मामला प्रकाश में आया है। स्कूल में पिछले एक महीने से मिड डे मील पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। बच्चों को अनाज न देकर सिर्फ चना, गुड़, खीरा और छुहाड़ा देकर पेट भरा जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन की मनमानी के कारण इस भीषण गर्मी में भूखे पेट ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।

बच्चों ने बताया कि स्कूल का रसोई कमरा पिछले एक महीने से बंद पड़ा है। यहां चूल्हे की भट्ठी तक टूट चुकी है। स्कूल में न तो चावल है, और न तो दाल, गेहूं, दलिया, अंडा, फल है। किसी भी प्रकार का अनाज हमें नहीं मिल रहा है। इस संबंध में विद्यालय सचिव तेजनारायण रजवार ने कहा कि विद्यालय में चावल नहीं होने के कारण बच्चों को भात नहीं दिया जा रहा है। चावल खत्म होने की सूचना प्रखंड मुख्यालय को दी गई है। लेकिन अब तक चावल नहीं मिल पाया है।

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई मिड डे मील योजना शुरू

मिड डे मील योजना स्कूलों में बच्चों का इनरोलमेंट बढ़ाने, उन्हें नियमित तौर पर स्कूल आने व स्कूल न छोड़ने के लिए प्रेरित करना, और बच्चों में होने वाले कुपोषण को दूर करने के लिए यह चालू की गई है। लेकिन लइयो तितरमरवा नव प्राथमिक विद्यालय में यह योजना पूरी तरह से फेल नजर आ रही है। यहां पर एक महीने से मिड डे मील बंद है। लेकिन अधिकारियों को इसकी सुध तक नहीं।

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