राष्ट्रीय रूर्बन मिशन के तहत घाटशिला प्रखंड की दो पंचायतों के 10 गांवों का कायापलट करने की योजना कागजों पर सिमट कर रह गई है। गत 3 साल पूर्व काशिदा और धरमबहाल के 10 गांवों को रूर्बन मिशन के तहत विकसित करने की योजना बनी थी। इतने दिन बीत जाने के बाद भी विकास कार्य धरातल पर नहीं उतर सकी। करीब एक अरब रुपए खर्च कर दोनों पंचायतों के गांवों को चकाचक करने की योजना बनी थी। दोनों पंचायत के चयनित गांवों में पंचायत निधि से योजनाओं में हुए खर्च राशि से रूर्बन मिशन की गाथा लिखी जा रही है। दोनों ही पंचायत के लोग पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि क्षेत्र की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। किसी भी विभाग ने कन्वर्जन के तहत रूर्बन मिशन के अंतर्गत किसी गांव में फंड डायवर्ट कर योजना को गंभीरता से पूरा करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली है। हर माह इसकी समीक्षा बैठक कर कोरम पूरा किया जा रहा है। इन बैठकों में लिए गए निर्णयों को गंभीरता से पूरा भी नहीं किया जाता है।
बैठक में बीडीओ संजय पांडेय, सागर गौतम, शीतल कुमारी, बीपीआरओ संजय सिंह, बिजली एसडीओ कपिल तिग्गा, एमओ एफए एक्का, जेई शशि शेखर, गौरव राज, बीसीओ प्रकाश कुमार, बीपीएम मयंक सिंह, बीएओ पतित पावन घोष, ब्लॉक मैनेजर प्रकाश कुमार, धरम बहाल मुखिया मानको मुर्मू, पंचायत सेवक हिरणमय मंडल, संजय दंडपात, कौशिक दे, पल्लव भकत आदि।
लोहिया भवन में रूर्बन मिशन की बैठक में शामिल लोग।
अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार करने की हिदायत
लोहिया भवन में रूर्बन मिशन धरम बहाल क्लस्टर की बैठक बीडीओ संजय पांडेय की अध्यक्षता में हुई। इसमें काशिदा और धरम बहाल पंचायत के 10 गांवों में अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की गई। रूर्बन मिशन के सागर गौतम ने कृषि, सहकारिता और बाल विकास के संबंधित अधिकारियों से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करने की सख्त हिदायत दी। कृषि विभाग के प्रभारी बीएओ पतित पावन घोष, सहकारिता पदाधिकारी प्रकाश कुमार, बाल विकास विभाग की महिला पर्यवेक्षक ज्योत्सना हांसदा को फील्ड विजिट कर सकारात्मक रूप से करने की हिदायत दी गई।
स्वास्थ्य केंद्र की डीपीआर में गिनाई खामियां
सागर गौतम ने काशिदा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई जाने वाली 25 लाख के स्वास्थ्य केंद्र की तैयार डीपीआर में कई खामियां गिनाई। 25 लाख के स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की डीपीआर केवल एक पेज में बनाकर भेजी गई है। इसमें भवन के मैपिंग की जगह अनुमंडल अस्पताल का चित्र लगा दिया गया है। अनुमंडल अस्पताल के बीपीएम मयंक सिंह ने उन्हें बताया कि विभाग द्वारा डीपीआर तैयार कर भेजी गई है। बताया कि काशिदा के पुराने अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध है। पुराने भवन को मरम्मत कर भी स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा सकता है।
चेंगजोड़ा गांव का आंगनबाड़ी केंद्र होगा मॉडल
सागर गातम ने कहा कि चेंगजोड़ा आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली नहीं है। शौचालय और साफ सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसका जवाब दे रही महिला पर्यवेक्षक ज्योत्सना हांसदा की बातों से असंतोष व्यक्त किया। उन्हे सख्त हिदायत दी कि जल्द से जल्द चेंगजोड़ा आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल आंगनबाड़ी बनाए जाने के लिए बिजली, साफ सफाई समेत अन्य कार्य पूरा कराए जाएं। बताया गया कि हेरिटेज विलेज के रूप में भी चेंगजोड़ा को विकसित किया जाना है।
2022 तक कृषकों के आर्थिक स्तर में सुधार करने का लक्ष्य
बीएओ पतित पावन घोष द्वारा काशिदा और धरम बहाल पंचायत में कृषि क्षेत्र में गत तीन माह में किए गए कार्यों की समानांतर रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने पर रूर्बन मिशन के अधिकारी सागर गौतम ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि काशिदा और धरम बहाल के किसानों को आय वृद्धि योजना के लिए ट्रैक्टर दिए जाने के प्रस्ताव दिए गए थे। लेकिन अब तक किसी किसान को इसका लाभ नहीं मिला है। किसानों को हर हाल में किसान क्रेडिट कार्ड से कृषि ऋण मिले। सरकार द्वारा कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि योजना के तहत 2022 तक कृषकों के आर्थिक स्तर में सुधार करने का लक्ष्य है।
पंचायत मद से 134 स्ट्रीट लाइट लगाने का निर्देश
काशिदा और धरम बहाल में 14वें वित्तीय आयोग मद से 134 स्ट्रीट लाइट, पंचायत भवन में सुविधा के लिए डोंगल, फैक्स और प्रिंटर मशीन खरीदने की हिदायत दी गई। कहा गया कि काशिदा पंचायत में स्नानघाट, सड़क किनारे और चौक पर आवश्यकतानुसार 100 स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं। इसके अलावा धरम बहाल के तीन गांवों में 34 स्ट्रीट लाइट लगाने का निर्देश दिया गया। बीडीओ संजय पांडेय ने कहा कि काशिदा में 17 लाख और धरम बहाल में 4.50 लाख पंचायत निधि की राशि आवश्यक कार्यों में जल्द खर्च कर लें। मई माह के अंत तक 14 वें वित्तीय मद से पंचायतों को राशि दी जानी है। पंचायतों में जितनी राशि अवशेष रहेगी उन्हें उतनी ही कम राशि मिलेगी।
क्या है रूर्बन मिशन
रूर्बन मिशन के तहत चयनित गांव में हर प्रकार की सुविधाएं विकसित करना है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, कृषि क्षेत्र को विकसित करने के लिए संबंधित विभागों द्वारा फंड कन्वर्जन कर अधिक से अधिक योजनाओं को संबंधित गांव में स्वीकृति देते हुए वहां की कमी दूर किया जाना था। इसको देखकर ही बनाई गई थी योजना।