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हर दिन 150 वाहनों से होती है वसूली, सरकार के खाते में केवल 36 वाहनों का जमा होता है पैसा

3 वर्ष पहले
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फूलडुंगरी बस पड़ाव से राजस्व की वसूली वहां तैनात अंचल कर्मियों के लिए कामधेनु गाय साबित हो रही है। छोटे- बड़े करीब 150 यात्री वाहन यहां से गुजरते हैं। कर्मियों द्वारा उनसे राजस्व की वसूली की जाती है। पर सरकारी खाते में हर दिन केवल 36 वाहनों का पैसा ही जमा हो रहा है। केवल औसत राशि ही सरकारी खाते में जमा की जा रही है। इससे सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। दूसरी ओर राजस्व वसूली के बाद भी यात्री सुविधा यहां शून्य है। हजारों यात्रियों का यहां से आनाजाना लगा रहता है, लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। बिना रसीद राशि वसूली का कोई हिसाब नहीं रहता है। राजस्व वसूली करने वाले कर्मी सादा कागज पर केवल वाहन संख्या अंकित कर राशि की वसूली करते हैं। सरकारी कर्मियों द्वारा वसूली जाने वाली राशि बस स्टैंड के डाक की न्यूनतम बोली की आधा राशि के बराबर है। लोगों का मानना है कि जिन दो कर्मियों को बस स्टैंड से राशि वसूली के लिए लगाया गया है, वह रोजाना औसत राशि जमा करते हैं। सरकारी खाते में जमा करने से ज्यादा राशि अपनी जेब में रखते हैं।

बस स्टैंड स्थित पानी टंकी।

हर रोज औसतन 1050 रुपए ही हो रहे हैं जमा

बस स्टैंड से हर रोज बड़े और छोटे 30-36 वाहनों से ही राजस्व वसूली दर्शायी जाती है। बड़े वाहनों से 40 और छोटे वाहनों से 20 रुपए वसूली का हिसाब दिया जाता है। जबकि एक अनुमान के अनुसार बहरागोड़ा रूट से बंगाल और ओड़िशा के करीब 20-25 बड़ी बसें, मुसाबनी रूट से 10-15 बसें संचालित होती हैं। वाहनों की संख्या 100 से ज्यादा है। इस प्रकार कर्मियों द्वारा सभी छोटे-बड़े यात्री वाहनों से राजस्व की वसूली तो की जाती है। लेकिन जब राशि को सरकारी खाते में जमा करने की बारी आती है तो वह औसतन 30-36 वाहनों के हिसाब से ही राशि जमा की जाती है। हर रोज औसतन 1050 रुपए ही सरकारी खाते में जमा हो रहे हैं।

वर्ष वार राजस्व वसूली

वर्ष 2013-14 में 5 लाख 64 हजार 500 (डाक से प्राप्त)

वर्ष 2014-15 में 3 लाख 68 हजार 290 (सरकारी कर्मियों से प्राप्त)

वर्ष 2015-16 में 3 लाख 68 हजार 710(सरकारी कर्मियों से प्राप्त)

वर्ष 2016-17 में 3 लाख 84 हजार970(सरकारी कर्मियों से प्राप्त)

वर्ष 2017-18 में 3 लाख 62 हजार200(सरकारी कर्मियों से प्राप्त)

क्या कहते हैं अधिकारी : सीओ राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि जिला परिषद के आदेश पर अंचल द्वारा फूलडूंगरी बस स्टैंड से पूर्व की भांति राजस्व की वसूली की जा रही है। जबकि इस वर्ष जिला परिषद द्वारा राजस्व वसूली किया जाना था। बस स्टैंड में राजस्व संग्रह के लिए रसीद की छपाई करने का निर्देश अंचल नाजीर को दिया गया है। रसीद से ही राजस्व संग्रह किया जाएगा।

वर्ष 2014-15 से नहीं हुई है निविदा

बस पड़ाव की अंतिम बार निविदा वर्ष 2013-14 में हुई थी। इसे सरकार को 5 लाख 64 हजार 500 रुपए राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन वर्ष 2014-15 में निविदा की न्यूनतम प्रारंभिक बोली में करीब 50 हजार रुपए की वृद्धि किए जाने के बाद से किसी ने निविदा प्राप्त करने में अपनी रुचि नहीं दिखाई। हर वर्ष अंचल और अन्य विभागों द्वारा इसकी निविदा निकाली गई। लेकिन निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। स्थानीय लोगों द्वारा निविदा की प्रारंभिक बोली की राशि को कम करने की कई बार मांग की गई। लेकिन इस पर विचार नहीं होने से सरकार को हर वर्ष करीब 2 से 3 लाख की क्षति हो रही है। जबकि वसूली के लिए स्टैंड में लगाए गए कर्मी मालामाल हो रहे हैं।

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