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बारिश का पानी स्कूल में घुसने से डेढ़ क्विंटल चावल और दस्तावेज बर्बाद

3 वर्ष पहले
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कन्या मध्य विद्यालय घाटशिला में बारिश का पानी घुसने से बच्चों के मध्यान्न भोजन का डेढ़ क्विंटल चावल और अन्य आवश्यक दस्तावेज पानी से खराब हो गए। मंगलवार को स्कूल भवन के अंदर बारिश पानी के साथ ही घुसे कचरों की सफाई कराई गई। स्टोर रूम में रखे तीन बोरी चावल और अन्य समान भी बारिश के पानी में डूबने के कारण पूरी तरह खराब हो गए। स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अनिता सामद, शिक्षिका अनुपमा महतो, रीता साधु, टिंकू चंद्रा, कमल किशोर गोप, काजल मुखर्जी, रोमा पांडा ने बच्चों के साथ मिल कर स्कूल भवन में जमा कचरों को साफ किया। इसके बाद जब स्टोर रूप को खोला तो उसमें रखे सभी सामान बारिश के पानी से पूरी तरह खराब हो गए थे। इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और अन्य लोगों को दी गयी।

भवन के अंदर से 3 फीट ऊंचाई से बह रहा था पानी

गत सोमवार को बिहारी कॉलोनी में पानी भरने के बाद पानी का बहाव बिहारी कॉलोनी के मुख्य सड़क से होते हुए कन्या मवि भवन से आगे की ओर हो रहा था। इससे स्कूल भवन के अंदर करीब 3 फीट तक पानी जम गया था। इससे स्कूल का संचालन भी उस दिन निकट के बालिका उच्च विद्यालय परिसर में किया गया था।

5 साल से है समस्या, छाता लगाकर पढ़ते हैं बच्चे

कन्या मध्य विद्यालय में बारिश के पानी से खराब हुआ चावल दिखाते शिक्षक।

छतरी लगाकर पढ़ाई करने को विवश कालापाथर स्कूल के बच्चे

कालापाथर मध्य विद्यालय के बच्चे क्लास रूम में बारिश का पानी टपकने से छतरी ओढ़कर पढाई करने को मजबूर हैं। बारिश का पानी भवन की छत से दिन भर टपकता रहा है। इससे कक्षा में पढ़ाई करने वाले बच्चे रोज घर से छतरी ले कर स्कूल आया करते हैं। ताकि पढ़ाई करते समय छतरी ओढ़कर पढ़ाई की जाए और किताबों को भीगने से बचाया जा सके। स्कूल भवन से गत 5 वर्षों से बारिश के मौसम में पानी टपकता है। इसकी सूचना विभाग को कई बार स्कूल प्रबंधन द्वारा दी गयी। लेकिन अब तक इस पर पहल नहीं की गई। स्कूल का शौचालय और बरामदे से भी पानी टपकता है। इस संबंध में स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक कालीपद पाल ने बताया कि भवन बनने के बाद से ही बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। दिन भर में हल्की बारिश हो कर बंद होने पर भी पूरे दिन भर भवन के छत से पानी टपकता रहता है। इससे बच्चें अपने किताबों की रक्षा के लिए पढ़ाई करते समय छतरी ओढ़कर बैठते हैं।

छत से टपकते पानी से बचाव के लिए छतरी ओढ़कर पढाई करते बच्चे।

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