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32 साल बाद बड़ागांव पहुंचे आचार्य विद्यासागर महाराज, तीन किमी दूर से उमड़े हजारों श्रद्धालु
भास्कर संवाददाता| टीकमगढ़/ बड़ागांव धसान
आचार्य विद्यासागर महाराज ससंघ 32 साल बाद बड़ागांव धसान पहुंचे। घुवारा के बुदौर गांव से ढोल नगाड़े के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने धसान नदी पर पहुंचकर महाराज की अगवानी की। आचार्यश्री के दर्शन पाने तीन किलोमीटर दूर से ही हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। चारों तरफ जयकारों की गूंज ने माहौल में गर्मजोशी ला दी। जगह जगह दरवाजे पर महिलाओं ने कलश रखकर आचार्यश्री की आरती बंधन की। इसके बाद आचार्य सिद्ध क्षेत्र फल होड़ी मंदिर पहुंचे। सुबह 8.30 बजे मंगल प्रवचन हुए।
आचार्यश्री शाम 4 बजे बड़ागांव से बिहार कर अमरपुर गांव पहुंचे। यहीं वे रात्री विश्राम करेंगे। आचार्यश्री के गुरुवार या शुक्रवार को पपौराजी पहुंचने की उम्मीद है। वे यहां बन रहे बोर्डिंग स्कूल प्रतिभा स्थली ज्ञानपीठ की आधारशिला रखेंगे। इसी सत्र से शुरु होने वाले इस स्कूल में पहली से छटवीं तक कक्षाएं संचालित होंगी। आचार्यश्री के आगमन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सीख : जीवन में संयम से काम लो
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सर्वप्रथम संयम धारण करना चाहिए। संयम के बगैर जीवन में कुछ नहीं है, जैसे कि माता पिता अपने बच्चों को बड़े ही ध्यान से पालन पोषण करता है, सोचता है कि वह आगे चलकर हमारा काम संभालेंगे। बुढ़ापे का सहारा बनेंगे, लेकिन ईश्वर की कृपा से उस व्यक्ति को जब बड़ा होकर ज्ञान आता है कि इस दुनिया में कोई किसी का नहीं है, नहीं तो घर द्वार त्याग कर हम जैसे साधुओं से दीक्षा लेकर घर वार त्याग देता है। सोचो माता पिता को क्या मिला फिर भी संयम संयम को धारण रखकर उसके माता.पिता अपने जीवन यापन करते हैं।
ये रहे सौभाग्यशाली
प्रवचन से पहले पाद प्रक्षालन का सौभाग्य डॉक्टर सुभाष चंद्र जैन दादर को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अत्याचारी जय निशांत को प्राप्त हुआ। इसके बाद आचार्यश्री का पूजन किया गया। तत्पश्चात आचार्य श्री के आहार चर्या का सौभाग्य अभय चौधरी बड़ागांव धसान को प्राप्त हुआ। यूपी के पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किया।
32 साल पुरानी स्मृितयां याद आईं
जैन मंदिर समिति के सदस्य राकेश केसरिया ने बताया 32 साल पहले आचार्य विद्यासागर महाराज का नगर बड़ागांव में आगमन हुआ था। आज एक बार फिर उनके आगमन से पुरानी स्मृतियां याद आ रही हैं।