आप अपने जुनून को इस तरह से पहचान सकते हैं
पिछले सप्ताह एक कार जिसे भारत में सिर्फ दो फीसदी लोग ही खरीद सकते हैं, मुंबई स्थित बांद्रा के एक व्यस्त लेकिन संकरे रोड से जा रही थी। यह सड़क इसलिए छोटी हो गई थी, क्योंकि मेट्रो रेलवे के निर्माण के कारण इसके अधिकांश हिस्से पर बैरिकेड लगे थे। अचानक इस विशाल कार की रफ्तार धीमी पड़ती है और एक कोने में पार्क होती है, जहां दो वर्कर चिलचिलाती धूप में घंटों काम करने के बाद ‘गल्ली’ क्रिकेट खेलकर अपना मनोरंजन कर रहे थे। ड्राइवर जल्दी पिछला दरवाजा खोलता है। मालिक नीचे उतरकर कुछ शॉट खेलने की इच्छा जताता है।
वर्कर अपनी टीम में कार मालिक को देखकर और उन्हें गेंद फेंककर रोमांचित हो जाता है। फील्डर तो फील्डिंग भूलकर अपने मोबाइल से वीडियो शूट करने लगता है। उस ‘गल्ली क्रिकेट’ में अब गेंदबाज और यह नया बैट्समैन यही दो गंभीर खिलाड़ी थे। अगले कुछ मिनटों में कुछ और कारें इस ‘गल्ली’ क्रिकेट को देखने के लिए थम गईं, जिसपर प्राय: कोई ध्यान नहीं देता। और जिस पल कुछ युवा लड़कियां बल्लेबाज का नाम लेकर पुकारने लगीं तो उसने वर्करों के साथ हाथ मिलाया, उनके अच्छे काम के लिए पीठ थपथपाई, चुपचाप अपनी कार में बैठ गया और किसी ईल मछली की तरह भीड़ में से निकल गया। यह बल्लेबाज और कोई नहीं क्रिकेट के आयकन सचिन तेंडुलकर थे और यह कोई रहस्य नहीं है कि बल्लेबाजी उनका जुनून है। जैसे हर क्रिकेट मैच में बैट थामने के लिए सचिन का हाथ मचलने लगता है फिर जगह कोई भी क्यों न हो, उसी तरह एक्सेंचर में काम करने वाले केएम मणिगंदन का पेट और उनकी जबान मचलने लगती जब वे सड़क पर खड़ी किसी गाड़ी पर कच्चे नारियल देखते हैं। वे कार रोककर सड़क किनारे से उन्हें खरीद ही लेते हैं। अपनी प्यास बुझाने के लिए उन्हें कम से कम तीन मिनट इंतजार करना पड़ता है। उसी वक्त उन्हें अहसास हुआ कि एरिटेड पेय आसानी से मिलते हैं और पीने में भी उतने ही आसान होने के कारण इतने लोकप्रिय हैं और नारियल पानी उतना लोकप्रिय पेय नहीं है।
उसके बाद वे पैकेज्ड फूड कंपनी ‘टेंको फूड्स’ का आइडिया लाए। मणिगंदन ने एक्सेंचर का जॉब छोड़कर अपनी कंपनी खोलने का फैसला किया। 2016 में बेंगलुरू के संस्थापक अर्पिता बहुगुणा, संतोष पाटिल के साथ मिलकर परिवार व मित्रों से जुटाए पैसों से तीनों ने एक मशीन विकसित की जो हरे नारियल को इस तरह छांट देती कि कोई भी किचन के छोटे चाकू या चम्मच से भी उसे खोल सकता है। प्रतिदिन 50 नारियल की बिक्री से शुरुआत करने के बाद 18 माह में वे रोज 4,000 से ज्यादा नारियल बेच रहे हैं। टेंको इस समय हाइपर सिटी, मोर, बिग बाजार, मेट्रो, नीलगिरीज़, नामधारीज़, नेचर्स बास्केट जैसे ऑफलाइन और अमेजॉन, बिग बास्केट, ग्रॉफर्स, जॉपनाउ और दूधवाला जैसे ऑनलाइन स्टोर को सप्लाई कर रही है।
2016 तक भारत में पैकेज्ड नारियल पानी का बाजार 1.53 करोड़ डॉलर (1 अरब रुपए से ज्यादा) है और उम्मीद है कि 17 फीसदी सालाना की कुल दर से यह 2020 तक 4 करोड़ डॉलर (2.67 अरब रुपए से ज्यादा) हो जाएगा। 2018 में नारियल का बाजार 12,000 करोड़ सालाना का है। उनका लक्ष्य अन्य शहरों में जाकर कम से कम एक फीसदी (120 करोड़ रुपए) बाजार का दोहन करने का है। नारियल से जुड़े अन्य प्रोडक्ट जैसे कोकोनट मिल्क, कोकोनट फ्लैक्स, कोकोनट शुगर और वर्जिन कोकोनट ऑयल आदि लाने की भी उनकी योजना है।
फंडा यह है कि  यदि आप सड़क किनारे कार रोककर कुछ करने को तड़प उठे, बिना ये सोचे कि लोग क्या सोचेंग तो यही आपका जुनून है।
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एन. रघुरामन
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